
मिनी हरिद्वार पर परंपरागत तरीके से किया गया बेहड़ा बिसर्जन, भव्य किश्ती रही आकर्षण का केंद्र, देहर खड्ड में लगाया लंगर
ज्वाली – अनिल छांगु
श्रावण संक्रांति के अवसर पर शनिवार को जवाली के मिनी हरिद्वार तट पर मेहरा समुदाय के लोगों ने ख्वाजापीर उत्सव धूमधाम से मनाया। देहर खड्ड दरिया में बेहड़ा बिसर्जन कर लोगों ने अपनी परंपरा बखूबी निभाई, जिसमें भव्य किश्ती आकर्षण का केंद्र रही। नदी में किश्ती के विसर्जन के बाद युवाओं ने लोगों को लंगर भी परोसा।
गौरतलब हैं कि करीब एक सप्ताह पहले ख्वाजापीर को एक किश्ती में सजाने का काम शुरू हो जाता है। स्थानीय लोग इसे अपनी भाषा में बेहड़ा कहते हैं। श्रावण संक्राति के दिन इस किश्ती अर्थात बेहड़े को भव्य रूप में सजाने के बाद इसमें मछली सवार ख्वाजापीर की प्रतिमा को धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर रखा गया।
इसके बाद झंडे के साथ ख्वाजापीर देवता की प्रतिमा को किश्ती में रखकर जयघोष के साथ शहर का चक्कर काटने के बाद देहर खड्ड की नदी के पास पहुंचाया गया। लोगों ने अपने देवता को दलिया, रोट, चपाती, हलवा और गेहूं से बनी कुंगणियां चढ़ाईं और सुख समृद्धि की कामना की। बाद में इस किश्ती को नदी में विसर्जित कर दिया गया।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह उत्सव उनके पूर्वजों की देन है और जैसे उनके पूर्वज मनाते थे वे भी सहज उसी तरीके से इस परंपरा को निभा रहे हैं और इसकी सीख युवा पीढ़ी को भी दे रहे हैं कि हमें अपने रिति-रिवाजों एवं परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए।
उनका कहना है कि उनके समुदाय के ज्यादातर लोग नदी किनारे बसते थे और मछली पकड़ने का काम किया करते थे। वस्तु विनिमय प्रणाली के दौरान ये लोग मछली का आदान-प्रदान करके ही दूसरी वस्तुएं प्राप्त करते थे।
उनका मानना है कि बरसात के दिनों में नदियों और नालों में पानी उफान पर होता था और इस समय उनका देवता ख्वाजापीर ही उनकी रक्षा करता है। इसी आस्था के साथ उनका समुदाय अपने देवता ख्वाजापीर के प्रति पूरी तरह समर्पित है।
