शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल के नवनियुक्त डीजीपी डाॅ. अतुल वर्मा ने कहा कि नई जिम्मेदारी उनके लिए अवसर के साथ चुनौती भी है। वह वीरवार को पुलिस मुख्यालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में बोल रहे थे।
डीजीपी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह हिमाचल को सबसे सुरक्षित राज्य मानते हैं। पूरे देश में हिमाचल एक ऐसा राज्य है, जहां छात्राएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में अकेले सफर करती हैं। ये प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
डाॅ. वर्मा ने कहा कि हिमाचल महिलाओं के लिए सेफ है और महिला अपराध के जो कुछ केस सामने आए हैं, उनमें गहनता से जांच की जा जारी है।
नशे की डिमांड कम करने, सप्लाई चेन तोड़ने और ट्रीटमैंट व रिहैबिलिटेशन पर रहेगा फोकस
डाॅ. अतुल वर्मा ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि जब डिमांड रहेगी तो नशा भी कहीं न कहीं से पहुंच जाएगा। ये भी सही है कि प्रदेश में क्राइम के हिसाब से मादक द्रव्यों की तस्करी एक बड़ा इश्यू है।
उन्होंने कहा कि सीआईडी के पोस्टिंग के दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर नारकोटिक्स की समस्या से निपटने के लिए एक रणनीति बनाई है, ऐसे में नशे की डिमांड को कम करने, सप्लाई चेन को तोड़ने और ट्रीटमैंट व रिहैबिलिटेशन पर फोकस रहेगा।
उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पहले से ही बहुत अच्छी है। प्रदेश पुलिस बैस्ट परफॉर्मिंग है और उसका प्रर्दशन अन्य राज्यों के मुकाबले अच्छा रहा है।
एक वर्ष में पहुंच रहीं 60 हजार शिकायतें
डीजीपी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश में नशे के बाद साइबर क्राइम से निपटने पर भी उनका मुख्य रूप से फोकस रहेगा। ठगी यहां होती है जबकि अपराधी बाहरी राज्यों में होते हैं। एक वर्ष में 60 हजार के आसपास शिकायत पहुंच रही हैं, ऐसे में ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि यहां संगठित गैंग और संगठित क्राइम नहीं है।
रोड इंजीनियरिंग-पार्किग पुलिस का इश्यू नहीं
डीजीपी अतुल वर्मा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि यातायात व्यवस्था सुचारू बने रहे, इसके लिए पुलिस हरसंभव प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई कम है। कहीं पार्किग का मसला है। रोड इंजीनियरिंग के साथ ही पार्किंग पुलिस का इश्यू नहीं है। इसी तरह वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

