कांगड़ा में रात 8.26 बजे के बाद होंगे चांद के दीदार

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हिमखबर डेस्क

सुहाग की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले करवाचौथ के व्रत को लेकर बुधवार को चांद का दीदार रात आठ बजकर 26 मिनट पर होगा।

ज्वाली के ज्योतिषी पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि इस साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थ तिथि की शुरुआत 31 अक्तूबर मंगलवार को रात 9:30 बजे से हो रही है। यह तिथि अगले दिन पहली नवंबर को रात 9:19 बजे तक रहेगी।

ऐसे में उदया तिथि और चंद्रोदय के समय को देखते हुए करवाचौथ का व्रत पहली नवंबर बुधवार को रखा जाएगा। पहली नवंबर को करवाचौथ के दिन सर्वार्थ सिद्धि और शिव योग का संयोग बन रहा है।

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:33 बजे से दो नवंबर को सुबह 04:36 बजे तक रहेगा। इसके अलावा पहली नवंबर की दोपहर 02:07 बजे से शिवयोग शुरू हो जाएगा। इन दोनों शुभ संयोग की वजह से इस साल करवाचौथ का महत्व और बढ़ गया है।

पहली नवंबर को करवाचौथ वाले दिन चंद्रोदय 8:26 बजे पर होगा। वहीं इस दिन शाम 5:44 बजे से 7:02 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।

पूजा विधि
करवाचौथ के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करके दीपक जलाएं। फिर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें। शाम के समय पुन: स्नान के बाद जिस स्थान पर आप करवाचौथ का पूजन करने वाले हैं, वहां गेहूं से फलक बनाएं और उसके बाद चावल पीस कर करवा की तस्वीर बनाएं।
इसके बाद आठ पूरियों की अठवारी बनाकर उसके साथ हलवा या खीर बनाएं और पक्का भोजन तैयार करें। इस पावन दिन शिव परिवार की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसे में पीले रंग की मिट्टी से गौरी की मूर्ति का निर्माण करें और साथ ही उनकी गोद में गणेश को विराजित कराएं।
कथा सुनते समय हाथ पर गेहूं या चावल के 13 दाने लेकर कथा सुनें। पूजा करने के उपरांत चंद्रमा निकलते ही चंद्र दर्शन के उपरांत पति को छलनी से देखें। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपने व्रत का पारण करें।

राजा दक्ष ने चंद्रमा को दिया था श्राप

ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने कहा कि करवाचौथ के व्रत को पुराणों में करक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। एक कथा है कि प्रजापति दक्ष ने एक बार चंद्रमा को श्राप दिया था कि तुम क्षीण हो जाओ, जो तुम्हारा दर्शन करेगा, उस पर कलंक आएगा।

तब चंद्रमा रोते हुए भगवान शंकर के पास पहुंचे, फिर भगवान शंकर ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी करक चतुर्थी के दिन तुम्हारा दर्शन करेगा, उसकी सारी कामनाएं पूरी हो जाएंगी। इसके अलावा इसका उल्लेख रामायण में भी मिलता है।

भगवान श्रीराम ने एक बार यह कहा था कि चंद्रमा में जो काला दाग है, वह एक प्रकार से विष के समान है और ऐसे में वह अपना विष छोड़ता है, इसलिए छलनी से चांद को देखने की परंपरा है। इस दिन पत्नी यह कामना करती है कि उनके जीवन में उनका साथी के साथ कभी वियोग न हो।

व्रत की मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवाचौथ का व्रत रखने की परंपरा की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। सबसे पहले श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने पांडवों के प्राण की रक्षा के लिए इस व्रत को किया था। कहा जाता है कि द्रौपदी के व्रत रखने के कारण ही पांडवों पर कोई आंच नहीं आई थी।
कहा जाता है कि हर सुहागिन स्त्री को अपने पति की रक्षा और लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखना चाहिए। साथ ही इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और आपसी संबंध मधुर होते हैं।
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