हिमखबर डेस्क
शिमला जिला के रोहड़ू उपमंडल के चिडग़ांव तहसील की ग्राम पंचायत तागनू-जांगलिख में कथित वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी सहित विभिन्न आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। यह मामला जिला कल्याण अधिकारी शिमला की ओर से भेजी गई ई-मेल शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत थाना चिडग़ांव में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में कई संदिग्ध लाभार्थियों के नाम सामने आए हैं। इनमें तांगण गांव और जांगलिख क्षेत्र के लोग बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इनमें कई लोगों की वास्तविक उम्र 44 से 54 वर्ष के बीच है, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें बुजुर्ग दर्शाकर वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत करवाई गई। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं।
आरोप ये भी है कि कुछ लोग वर्ष 2018-19 से ही पेंशन का लाभ ले रहे थे, जबकि कुछ नाम बाद के वर्षों में सूची में जोड़े गए। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। जांच में पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जा रही है।
मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों को शक है कि दस्तावेजों में हेराफेरी कर सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए मिलीभगत हुई हो सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
सम्बंधित विभाग की तरफ से अपने स्तर पर जांच के बाद पुलिस में केस दर्ज करवाया गया। पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर पूरे नेटवर्क की जांच करेगी।

