
हिमखबर – डेस्क
सम्मान
ह्र्दय को न पाषाण कर, इसमें मानवता का भी कुछ सम्मान कर।
जो मिट चुका है उसको मिटने दे,
नवीन आते ज्ञानधारा के स्रोत का कुछ सम्मान कर।
भूमंडल की भूतल पर न किसी का अपमान कर,
अपनों के साथ-साथ पराएओ के लिए भी हृदय से सम्मान कर।
आगाज अगाध उड़ते परिंदों पर तो सब मान करते हैं
नवीन उड़ते पुलकित पंखों का भी तू कुछ सम्मान कर।
मौलिकता प्रमाण पत्र
मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।
राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक) गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
पता-गांव जनयानकड़ पिन कोड -176038 कांगड़ा हिमाचल प्रदेश 9876777233 rajivdogra1@gmail.com
