उपायुक्त कांगड़ा डॉक्टर निपुण जिंदल को भेंट किया अपनी पहली खेती से उगा हुआ ड्रैगन फ्रूट

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व्युरो – रिपोर्ट 

विकासखंड नगरोटा सूरिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत घाड जरोट के निवासी सेवानिवृत्त प्रवक्ता जीवन राणा तथा उनके बेटे अशीष राणा ने वर्ष अक्टूबर 2020 में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी।

आज 2022 में यह ड्रैगन की खेती एक बड़ा इतिहास और आर्थिक समृद्धि का जरिया बन गई है। जीवन राणा ने बताया कि उन्हें बागवानी उपनिदेशक डॉ कमल नेगी ने जिला कांगड़ा के जिलाधीश महोदय से मिलवाया और इस ड्रैगन खेती के बारे विस्तार से जानकारी दी।

कैसे राणा ने यह खेती शुरू की थी और आज इस ड्रैगन फ्रूट को जिला कांगड़ा के जिलाधीश महोदय डॉक्टर निपुण जिंदल को सबसे पहले भेंट किया।

जिलाधीश महोदय ने जीवन राणा और उनके बेटे को इस प्राकृतिक खेती करने पर उन्हें बधाई दी और उन्हें प्रोत्साहित करने की बात कही।

जिला कांगड़ा में पहला इतना बड़ा किसान प्रोजेक्ट खेती का लगा है। जीवन राणा के पिताजी एक बहुत बड़े किसान थे और बचपन से ही खेती की तरफ विशेष रूचि थी।

अपनी इस खेती बाड़ी की विरासत को संभालने के लिए जीवन राणा ने बताया कि सेवानिवृत्त के बाद उन्होंने ड्रैगन फ्रूट खेती करने का एक बड़ा कदम उठाया और उनकी पत्नी कुंता राणा ने भी इस खेती करने के लिए उनका पूरा सहयोग दिया।

करीब 6 कनाल भूमि पर ड्रैगन फ्रूट के 500 पौधा लगाया।इसे प्राकृतिक खेती विधि से वर्ष 2020 में इसे शुरू किया था और 2021 में फ्रूट के सैंपल आ गए थे और इस वर्ष इसमें अच्छी पैदावार होने की आशा है ।

राणा ने बताया कि इस कार्य के लिए उनके बेटे ने भी उनके साथ पूरी मदद की। बीटेक इंजीनियरिंग करने के बाद भी बेटे ने इस ड्रैगन खेती के लिए विशेष रुचि के साथ कार्य किया और अब पिता की के साथ खेती में पूरी सहायता कर रहा है।

राणा ने बताया कि उनके पास 30 कनाल से अधिक भूमि है। राणा ने बताया कि उन्होंने इस ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी पंजाब के बरनाला शहर से लाई थी और इस पर 2 से 5 लाख रुपए खर्च खर्च किए थे और इस खेती के लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से जिव अमृत धन जीवन अमृत खाद का प्रयोग किया है ।

इसी खाद के जरिए आज यह इतनी बड़ी खेती हुई है। प्राकृतिक खेती विधि से पौधे बड़ी अच्छी तरह से बढ़ रहे हैं और आशा जताई कि यह तीसरे साल के बाद 5 से 6 लाख रुपए वार्षिक आय देंगे ।

इस ड्रैगन फ्रूट की डिमांड हर शहर में होती है लेकिन यहां पर कोई बड़ी मार्केट या मंडी नजदीक ना होने से परेशानी है। पानी की भी अभी उनके क्षेत्र में सिंचाई के लिए कोई ठीक व्यवस्था नहीं है। कम पानी होने के बावजूद भी प्राकृतिक खेती विधि से फल सब्जियां भी बहुत अच्छी पैदावार यहां होती है ।

जीवन राणा ने बताया कि पहले जहां इंसानों और कीटनाशकों के खर्च पर उनका ₹12000 के करीब खर्च आता था और कुल आय 60 से ₹ 65 हजार रुपए हो रही थी लेकिन अब इस ड्रैगन फ्रूट के लगने से उनकी आय भी अच्छी होगी।

उन्होंने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती से यहां पर और भी तरह-तरह की सब्जियां लगाई हैं। जिन की पैदावार भी बहुत अच्छी होती है और लोग इस प्राकृतिक खेती मॉडल को देखने के लिए आते हैं।

यदि कोई प्राकृतिक खेती के जरिए अपना काम करना चाहता है ड्रैगन फ्रूट या अन्य खेती करना चाहता है तो उसे पूरी जानकारी दी जाती है। इसके चलते यहां पर बहुत से किसान आप प्राकृतिक खेती की तरफ पढ़ रहे हैं।

कांगड़ा जिले के परियोजना निदेशक आत्मा डॉ शशि पाल अत्री ने कहा कि नगरोटा सूरियां के जीवन राणा ने कम लागत लगाकर ड्रैगन फ्रूट का सफल मॉडल खड़ा कर क्षेत्र के किसान बागवान के सामने एक आर्थिक और सुदृढ़ करने का एक सशक्त विकल्प दिया है जो कि एक बहुत बड़ा उदाहरण है।

कांगड़ा जिले में इतना बड़ा ड्रैगन फ्रूट की खेती कहीं नहीं है। यह पहला ड्रैगन फ्रूट जिला कांगड़ा में है। राणा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट ₹250 किलो बिक रहा है और इस वर्ष 5 क्विंटल से अधिक पैदावार हो सकती है तथा अगले वर्ष इसमें काफी बढ़ोतरी हो जाएगी ।

इसके अलावा राणा ने बताया कि हम इस ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं ताकि जो भी कोई किसान इसे लगाना चाहता है लगा सकता है ।

आज जिला कांगड़ा के अलावा प्रदेश के हर जिले में इस ड्रैगन फ्रूट की खेती की उदाहरण किसानों को दी जा रहे हैं विभाग द्वारा शीघ्र ही राणा को सम्मानित किया जाएगा।

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