
इन्दौरा – व्यूरो रिपोर्ट
एक और हम देश भर में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो दूसरी और स्वास्थ्य खंड इंदौरा का एक गांव ऐसा भी है जो जो स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पंजाब पर निर्भर है। जहां कई सरकारें आ गई लेकिन इन गांवों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं खोल पाई।
माजरा व उसके साथ लगते गांवों में विकास के बड़े बड़े दावे करने वाले नेताओं के खोखले दावों की भी यहां पोल खुलती हैं। माजरा की आबादी 1596 है, जबकि इसके साथ लगते मोहटली, खरड़, मोहटली के वार्ड नंबर 7 व 8 में एक हजार से ज्यादा की जनसंख्या है तो वहीं डमटाल के वार्ड नंबर 6 जिसकी आबादी 250 है।
छन्नी बेली पंचायत का भी एक वार्ड इसके साथ लगता है उधर साथ ही बेली महंता पंचायत की 3 हजार की आबादी भी माजरा के साथ लगती है। यह वो गांव है जो चक्की दरिया के पार है तथा यहां की जनता को स्वास्थ्य सुविधा के लिए पठानकोट जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है की उन्हें आजादी के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र नसीब नहीं हुआ है, सरकार द्वारा केवल आश्वासन ही दिए जाते हैं अगर घर में किसी को बीमार होने के चलते बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के इंदौरा आगमन परइंदौरा विधानसभा की विधायिका रीता धीमान ने अपने गांव के लिए आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग तो मुख्यमंत्री समक्ष रखी थी, लेकिन माजरा व आस-पास के उक्त गांवों की जनता की कोई मांग मुख्यमंत्री के समक्ष नहीं रखी गई।
माजरा निवासी करनैल सिंह राजू ,सोनू जगतार सिंह, नीतू गुलेरिया, सुखदेव सिंह आदि का कहना है कि इन गांवों से सरकार सौतेला व्यवहार ही करती आई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा के बोल
इस विषय पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डा. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि इस विषय को लेकर बीएमओ से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी तथा इसपर जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
