
चम्बा- भूषण गुरुंग
चंबा मेडिकल कॉलेज से लगातार विशेषज्ञ नौकरी छोड़ रहे हैं जिससे मरीजों की जान को भी खतरा हो सकता है। महिला और कैंसर रोग विशेषज्ञों के बाद अब शिशु रोग विशेषज्ञ ने भी नौकरी छोड़ दी है। दो वर्षों से चंबा मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देने वाले शिशु रोग विशेषज्ञ ने प्रबंधन को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।
शिशु रोग विभाग अब दो विशेषज्ञों के सहारे रह गया है जबकि जिलेभर से लोग अपने बीमार बच्चों का इलाज करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भर हैं। ऐसे में दो विशेषज्ञों को मेडिकल कॉलेज में इस विभाग को चलाना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि सरकार ने टांडा से शिशु रोग विशेषज्ञ की चंबा में प्रतिनियुक्ति पर तैनाती की है लेकिन वह भी किन्हीं कारणों से आजकल ड्यूटी नहीं दे पा रहे हैं। शिशु रोग ओपीडी में रोजाना 200 से 300 बीमार बच्चों की जांच की जाती है। इसके अलावा 50 से अधिक बच्चे वार्ड में भर्ती रहते हैं। उनके इलाज का जिम्मा अब दो विशेषज्ञों के कंधों पर आ गया है।
मेडिकल कॉलेज चंबा के महिला रोग विभाग से दो विशेषज्ञ, कैंसर रोग विभाग से दो और हड्डी रोग विभाग से एक विशेषज्ञ नौकरी छोड़कर पहले ही जा चुके हैं।
अब शिशु रोग विभाग से भी विशेषज्ञों ने जाना शुरू कर दिया है। ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में चंबा मेडिकल कॉलेज के सभी विभाग खाली हो जाएंगे।
गौरतलब है कि जिले की पौने छह लाख की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भर है। मरीजों को मजबूरी में जिले के बाहर या निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ेगा।
प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने बताया कि शिशु रोग विशेषज्ञ ने अपना त्यागपत्र दिया है जिसे सरकार को भेजा गया है। इससे पहले भी विशेषज्ञ नौकरी छोड़ चुके हैं। इसके बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। सरकार से नियमित तौर पर चंबा में चिकित्सकों की तैनाती की मांग की गई है।
