नवरात्रि विशेष:7 अक्तूबर से नवरात्रे शुरू

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पण्डित अंकुश शर्मा नलेटी

हिन्दू धर्म में नवरात्रे साल में दो बार मनाये जाते है। दीपावली से ठीक पहले मनाई जाने वाली नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहते हैं । ग्रीष्म आरंभ होने से पहले मनाये जाने वाले नवरात्र को चैत्र नवरात्र या वासन्ती नवरात्र’ कहते हैं। दोनों ही नवरात्रों का अपना विशेष महत्व और पूजा-विधि अलग-अलग है।

चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहला दिन मां शैलपुत्री, दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरा दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है।

हिन्दू धर्म में मां की आराधना दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती ये तीन रूप में करते हैं। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है “या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते” यानी “सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ/ देवी तुम स्थित हो”। ऐसे में नवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रूपों को निहारने औप उनकी आराधना की जाती है।

शास्त्रों के मुताबिक, हमारी चेतना के अंदर तीन प्रकार के गुण व्याप्त हैं। इनमें सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण है। प्रकृति के साथ इसी चेतना के उत्सव को नवरात्रि कहते है। नवरात्रि के 9 दिनों में पहले तीन दिन तमोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं, दूसरे तीन दिन रजोगुणी और आखरी तीन दिन सतोगुणी प्रकृति की आराधना का महत्व है।

आखिरी दिन भक्त विजयोत्सव मनाते हैं, क्योंकि हम तीनो गुणों के परे त्रिगुणातीत अवस्था में आ जाते हैं। काम, क्रोध, मद, मत्सर, लोभ आदि जितने भी राक्षशी प्रवृति हैं उसका हनन करके विजय का उत्सव मनाते है। हर एक व्यक्ति इससे मुक्त होकर शरीर की शुद्धि, मन की शुद्धि और बुद्धि में शुद्धि के लिए नवरात्रि के 9 दिनों में मां की अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं।

नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है नौ राते । इन्ही नौ रातों और दस दिनों में दौरान देवी के नौ रूपो की पूजा की जाती है। दसवां दिन दशहरे के नाम से प्रसिद्ध है।

महिषासुर से रक्षा करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना की। उन सभी के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिसने एक बेहद खूबसूरत अप्सरा के रूप में देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया। दसवें दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया और तभी से ये नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

कब करें कलश स्थापना नवरा​​त्रि 2021 कलश स्थापना मुहूर्त

07 अक्टूबर को नवरात्रि का प्रथम दिन है। इस दिन कलश स्थापना या घटस्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा प्रारंभ होती है। 07 अक्टूबर को आप अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना करें, यह सर्वोत्तम मुहूर्त होता है। अभिजित मुहूर्त दिन में 11:37 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक है। इसके अलावा प्रात:काल में 6:54 बजे से सुबह 9:14 बजे के मध्य नवरात्रि कलश स्थापना करें।

 

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