हिमाचल में मिडल क्लास को झटका देगी बिजली, मीटर सिक्योरिटी रेंट में होगा बदलाव

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शिमला, जसपाल ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में उपभोक्ताओं की बिजली कनेक्शन की धरोहर राशि यानि मीटर सिक्योरिटी रेंट आपकी बिजली के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा। यह राशि हर साल रिव्यू होगी यानी ज्यादा बिजली खर्च की जाएगी तो उसके हिसाब से एवरेज आधार पर यह सिक्योरिटी राशि बढ़ाई जाएगी। इससे वह लोग जिनकी बिजली की खपत ज्यादा नहीं है और गरीब लोग हैं उनके लिए तो फायदा रहेगा परंतु मिडल क्लास व्यक्ति को हर साल बढ़ी हुई सिक्योरिटी राशि देनी होगी।

सूत्रों के अनुसार इसमें उपभोक्ताओं को तीन किश्तों में यह राशि चुकता करने का विकल्प बिजली नियामक आयोग ने दिया है। राज्य के बिजली नियामक आयोग ने हाई कोर्ट से हुए फैसले के बाद इस मामले को रिव्यू किया है और इस पर अपना नया फैसला दिया है। पहले यहां पर सभी के लिए एक तरह की सिक्योरिटी राशि तय थी। यानी जो उपभोक्ता एक किलोवॉट बिजली का कनेक्शन लेकर उतनी ही बिजली की खपत करता था उसे भी यही सिक्योरिटी राशि देनी पड़ती थी और जो ज्यादा खपत करता है उससे भी यही राशि ली जाती थी।

अब बिजली नियामक आयोग ने बिजली बोर्ड को आदेश दिए हैं कि 120 रुपए प्रति किलोवॉट की दर से सिक्योरिटी राशि बिजली कनेक्शन पर शुरुआत में ली जाएगी। इसके बाद हर छह महीने व एक साल में उपभोक्ता की खपत के आधार पर इसका रिव्यू होगा और उसी फार्मूले के आधार पर यानि एवरेज बिलिंग के आधार पर यह राशि बढ़ती रहेगी।

कुछ महीने पहले बिजली बोर्ड ने उपभोक्ताओं से यह सिक्योरिटी राशि 120 रुपए प्रति किलोवॉट की जगह पर 1160 रुपए प्रति किलोवॉट कर दी थी मगर हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी गई। इसी तरह से लघु उद्योगों के लिए यह राशि 500 रुपए प्रति किलोवॉट से बढ़ाकर 2044 रुपए कर दी गई थी जिसे अब 1000 रुपए प्रति किलोवॉट किया गया है।

वहीं, बड़े उद्योगों के लिए यह धरोहर राशि जोकि 4880 रूपए प्रति किलोवॉट की गई थी को नियामक आयोग ने दो हजार रूपए प्रति किलोवॉट कर दिया है। नियामक आयोग ने अब यह तय कर दिया है कि उपभोक्ता की खपत के हिसाब से यह धरोहर राशि बढ़ती रहेगी, जिसका सबसे बड़ा नुकसान मध्यम वर्गीय लोगों पर पड़ेगा जिनकी बिजली की खपत लगातार बढ़ती रहती है। यह आदेश लागू कर दिए गए हैं।

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