टीचर को आई ऐसी चिट्ठी, पढ़ते ही फूट-फूटकर रो पड़े बच्चे, सिसकते हुए कहा- ऐसा नहीं हो सकता..
मंडी – अजय सूर्या
सनातन संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। एक गुरु ही है जो हमें सही और गलत का अंतर समझाता हैं, इसलिए शिक्षकों को शिष्य का सच्चा पथ प्रदर्शक कहा जाता है। गुरु व शिष्य के इस अटूट रिश्ते का भावुक कर देने वाला एक मंजर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के सुंदरनगर में देखने को मिला।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय छातर में एक शिक्षक के तबादले का पता चलते ही बच्चे फूट-फूटकर रोने लगे। बच्चों का ये लगाव देखकर अध्यापक की आंखों से भी आंसू छलक गए। रोशन लाल छातर स्कूल में शास्त्री शिक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
उन्होंने विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के दिल में ऐसी जगह बनाई थी कि हर बच्चा अपना सुख दुख, पठन-पाठन से समस्याओं को रोशन लाल शास्त्री से ही बताते थे। शास्त्री ने विद्यालय के वातावरण को गुरुकुल की भांति सभ्य और संस्कारित कर दिया है। प्रत्येक बच्चों में संस्कृत के प्रति रुचि पैदा कर दी थी।
बता दें खाली समय में संस्कृत के श्लोक सुनने को मिलते थे। बच्चों के पठन-पाठन, सुलेख, संस्कार युक्त कार्य के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाते थे। यही नहीं रोशन लाल ने गरीब परिवार के बच्चों के लिए वर्दी, जूते, जुराबें, कॉपियां भी अपनी ओर से वितरित की।
उन्होंने विद्यालय के भौतिक विकास के लिए भी उत्कृष्ट कार्य किए है। इससे पूर्व भी रोशन लाल ने नौलखा स्कूल के लिए विद्यालय भवन के लिए भूमि की व्यवस्था, पुराने विद्यालय के लिए शौचालय, रसोईघर, चार दीवारी आदि अनेक कार्य किए है जिसके लिए उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक मंडी ने सम्मानित भी किया है।
विद्यालय प्रभारी शबनम सैनी के बोल
विद्यालय की प्रभारी शबनम सैनी ने कहा की रोशन लाल शास्त्री कर्मठ और मेहनती अध्यापक है। विद्यालय में इनकी कार्यशैली सबसे अलग है। ये हमेशा बच्चों के बीच रहकर नई-नई चीजें सिखाते रहते हैं। बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए हमेशा प्रयासरत रहते है। इन्होंने लोगों के साथ विद्यालय की भूमि की समस्या का भी निदान किया।

