
बिना ढक्कनों के डस्टबिन लोगों का चिढ़ा रहे मुंह
कांगड़ा – राजीव जसवाल
टांडा अस्पताल के बाहर परिसर में कूड़ा-कचरा बुरी तरह से फैला हुआ है। टांडा अस्पताल में 250 से अधिक सफाई कर्मचारियों के होने के बावजूद परिसर में कूड़ा कचरा चारों तरफ फैला हुआ है। जगह-जगह कचरे से भरे डस्टबिन पड़े हुए हैं। न तो इन डस्टबिनों में कोई ढक्कन लगे हैं और न ही इन्हें खाली किया गया है।
टांडा अस्पताल में आए हुए मरीज व उनके तीमारदार दिन में टांडा अस्पताल के प्रांगण में बैठते हैं, परंतु ऐसी गंदगी में बैठना उनके लिए बहुत मुश्किलों भरा है। कूड़े-कचरे से भरे इन डस्टबिनों के चारों तरफ बंदर ही बंदर मंडराते रहते हैं। ऐसे में इन मरीजों का बाहर बैठना दुश्वार हो गया है।
हैरानी की बात है कि टांडा अस्पताल में इस समय लगभग 250 से ज्यादा सफाई कर्मचारी कार्य करते हैं, परंतु टांडा अस्पताल का परिसर गंदगी से भरा पड़ा है और इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
टांडा अस्पताल के परिसर के साथ रास्ते से गुजरना बड़ा मुश्किल हो गया है, क्योंकि खुले कचरे के डस्टबिनों में बंदरों का बहुत आतंक रहता है ऐसे में महिलाओं व बच्चों का यहां से जाना बहुत मुश्किल हो गया है।
