फतेहपुर मे भाजपा से आजाद हुआ जख्मी शेर बन बैठा है भाजपा प्रत्याशी के लिए सिरदर्द

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जनसभाओ के दौरान बीजेपी प्रत्याशी राकेश पठानिया को खूब सुना रहे है खरी-खोटी, कहा:- कहां गयी 20 लाख से रैहन स्टेडियम के जीर्णोद्धार करने की घोषणा ।

फतेहपुर – अनिल शर्मा

राष्ट्रीय व प्रदेश के नेताओ मे अच्छी पकड़ रखने बाले व प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी का दूत कहलाने बाले फतेहपुर मे भाजपा से आजाद हुए भाजपा के पुर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार भाजपा प्रत्याशी राकेश पठानियां के लिए जख्मी शेर बन बैठे है ।

कृपाल परमार अपनी नुक्कड़ जनसभाओ के दौरान बीजेपी प्रत्याशी राकेश पठानिया को खूब खरी-खोटी सुना रहे है ।
कृपाल परमार ने कहा कि जब जब राकेश पाठनियां विधायक बने थे तो डीलिमिटेशन के बाद एक भी बंदा खड़ा होकर बता दे की जिसका काम किया हो आपके वोटों से वह विधायक बने लेकिन उसके बाद आप लोगों को भूल गए और नूरपुर में जाकर बैठ गए ।

जो राकेश पठानिया संगठन की बातें करते हैं फतेहपुर से नूरपुर जाते हैं उनके नूरपुर के कार्यकर्ता और वो खुद रणवीर सिंह निक्का का विरोध क्यों करते हैं सुलाली और सदमा के लोग कांग्रेस क्यों ज्वाइन कर लेते हैं.

कृपाल परमार ने सीधा निशाना साधते हुए कहा कि रणबीर सिंह निक्का का विरोध इसलिए करवा रहे हैं ताकि रणवीर सिंह निक्का नूरपुर से हार जाए और वहां की सीट भी खाली रहे ताकि मैं यहां फतेहपुर से जीतकर नूरपुर में बैठ जाऊं और फिर आपको वीच मजदार मे छोड़ कर चला जाएगा।

कृपाल परमार ने भावुक होते हुए कहा कि मैं 40 साल से राजनीति में हूं क्या कभी आपने सुना कि कृपाल परमार ने पैसे मांगे हैं या उसके बेटे ने पैसे मांगे हैं। कृपाल परमार ने कहा की मै पूरे हिमाचल के हजारों कर्मचारी खड़े कर सकता हूं जो यह कहते हैं कि राकेश पठानिया ने पैसे मांगे तब जाकर काम हुआ ।

फिर से आरोप लगाते हुए कहा कि और तो और खैर या देवदार के पेड़ों के पेड़ काट दिए गे, जायका मे तीन करोड़ के फर्जी विल बना दिए और डकार तक नही मारा है जब वो मंत्री थे तव उनको फतेहपुर की याद क्यू नही आई ।

मंत्री रहते उन्होंने फतेहपुर के लिए क्या किया वताए आज । रैहन मे स्टेडियम के जीर्णोद्धार का सपना लोगो को तो दिखा गये मगर वताए उनकी रैहन मे स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए 20 लाख की घोषणा कहा तक पुरी हुई है।

अपने कार्यकाल मे राकेश पठानिया ने अपने ही इलाके में हजारों की संख्या में पेड़ काट दिए और पेड़ काटने वाले उनके अपने ही परिवारों से थे।

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