बुरी फंसी मनाली की यशिका ठाकुर, लाहौल की ट्राइबल कम्युनिटी पर कमेंट पड़ा भारी, 5 धाराओं में FIR दर्ज, कितनी होगी सजा?

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश कुल्लू जिला अस्पताल में महिला की मौत को लेकर हुए विवाद में मनाली की युवती को सोशल मीडिया पर कमेंट करना भारी पड़ गया। युवती ने लाहौल स्पीति की ट्राइबल कम्युनिटी पर कमेट किया था और अब लाहौल के उदयपुर में शिकायत के बाद केस दर्ज कर लिया गया है। अहम बात है कि आरोपी यशिका पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

दरअसल, यशिका के कमेट के बाद लाहौल स्पीति के लोगों ने नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई। ऐसे में उदयुर के सलग्रां समेय अन्य गांव के लोगों ने उनके खिलाफ पुलिस को शिकायत दी।

कुल्लू के मनाली की रहने वाली यशिका ठाकुर ने सोशल मीडिया पर जनजातीय समुदाय और आरक्षण व्यवस्था को लेकर टिप्पणी की थी और उसका स्क्रीनशॉट काफी वायरल हो गया। उदयपुर थाना में यशिका ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और पुलिस अब वायरल पोस्ट, स्क्रीनशॉट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

क्या लिखा था

यशिका ने एक फेसबुक पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, ‘’लाहौल स्पीति के इन लोगों को बड़ी आसानी से नौकरी मिली है। ऐसे में उन्हें बोलना भी नहीं आता है। तुम लाहौल के कुत्ते कितनी भी नौकरी ले लो, तुम चाहे कितनी भी नौकरी ले लो, लेकिन रहोगी तो ट्राइबल कम्युनिटी है, जिसकी कोई इज्जत नहीं है।’’

विवाद बढ़ने और सोशल मीडिया पर लगातार विरोध के बाद यशिका ठाकुर ने वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि कुल्लू अस्पताल में महिला की मौत की घटना से वह बेहद दुखी और भावनात्मक रूप से आहत थीं, जिसके कारण उनसे ऐसी टिप्पणी की और उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

साथ ही उन्होंने अपना विवादित फेसबुक कमेंट भी हटा दिया है हालांकि, कमेंट वायरल होने के बाद लोगों ने गुस्सा दिखाया और यशिका की माफी भी स्वीकार नहीं की।

विधायक अनुराधा राणा ने दी प्रतिक्रिया

लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाती हैं, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदायों को मिले संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के पीछे एक लंबा ऐतिहासिक और सामाजिक संघर्ष रहा है, जिसे समझना जरूरी है। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा से बचने की अपील की।

यशिका पर लगी पांच धाराएं

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 के दर्ज केस दर्ज हुआ है। इसमें विभिन्न समुदायों के बीच में शुत्रता को बढ़ावा देना औऱ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप है। इसमें अधिकतम सजा 3 वर्ष तक रहती है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 352 भी लगाई गई है और जिसमें कि जानबूझकर सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान करना या उकसाना और अधिकतम सजा 2 वर्ष तक है, साथ ही जुर्माना भी लगता है।
  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) के तहत भी केस दर्ज हुआ है और इसमें किसी अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर जानबूझकर अपमानित या बेइज्जत करना शामिल है। 6 माह से 5 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है।
  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(s) के तहत जातिसूचक शब्दों या अन्य तरीके से सार्वजनिक रूप से अपमानित करना। 6 माह से 5 वर्ष तक की सजा यशिका को हो सकती है।\
  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(u) के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति के विरुद्ध घृणा, वैमनस्य या भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप है और 6 माह से 5 वर्ष तक जेल तथा जुर्माना हो सकता है।

क्या है मामला

दरअसल, 21 जून को कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई थी और उसके बाद कुल्लू में काफी हंगामा और बवाल हुआ था। लाहौल-स्पीति की रहने वाली एक महिला डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया।

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) भी लाहौल-स्पीति से संबंध रखते हैं और इसी वजह से कमेंट किया गया था। इसमें फिलहाल, उदयपुर में केस दर्ज हुआ है और कुल्लू में भी पुलिस को शिकायत दी गई है।

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