
व्यूरो रिपोर्ट
ये कैसा आजादी का 75वां अमृतकाल चल रहा हैं? जिसमें जिला कांगड़ा के मुख्यालय व स्मार्ट सिटी धर्मशाला के साथ लगते क्षेत्र खनियारा लूंटा में पालकी पर मरीज पहुंचाए जा रहे हैं। ऐसे में खनियारा सोकणी द कोट के लूंटा गांव के लोग आज भी गुलामी का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।
गांववासियों ने भी निराश होकर आरोप लगाया है कि वोट मांगनें तो सब पहुंच रहे, लेकिन अभी तक रोड़ नहीं मिल पाया है। सडक़ न होने से पालकी में बैठ कर अस्पताल जाने के लिए लोग मजबूर हो रहे हैं। हालांकि इस बीच एक सुखद खबर मात्र यह है कि धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया ने विधायक प्राथमिकता में खनियारा से लूंटा की अढ़ाई किलोमीटर सडक़ को स्वीकृत करवाकर साढ़े छह करोड़ मंजूर करवा दिए हैं।
हालांकि अब तक काम शुरू न होने से रविवार को फिर बुजूर्ग महिला विद्या देवी पत्नी होशियार सिंह के बीमार होने पर उन्हें पालकी में बिठाकर ही सडक़ तक पहुंचाना पड़ा। आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी सबसे बड़े जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला के ग्रामीण क्षेत्र अभी सडक़ सुविधा से महरूम है।
किसी भी गंभीर बीमारी या गर्भावस्था में पालकी में उठाकर ही लोगों को सडक़ तक पहुंचाने के लिए लोग मजबूर हैं। रविवार को भी गांव की महिला के बीमार होने पर उन्हें पालकी में उठाकर ही सडक़ तक पहुंचाया गया। तो ऐसे में कई बड़े सवाल हिमाचल प्रदेश की सरकारों, विभागों व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उठते हैं।
धर्माशाला की ग्राम पंचायत सोकणी दा कोट खनियारा के लूंटा-टिल्लू वार्ड नंबर चार और पांच के लिए आज तक सडक़ सुविधा नहीं है। गांव मुख्यालय से मात्र 10 से 12 किलोमीटर दूर है, आजादी के 75 साल होने के बाद भी आज तक गांव भाग्य रेखाओं से नहीं जुड़ पाया है।
इस गांव के लोगों के लिए आजादी के कोई मायने अब तक नहीं हैं। गांव में लगभग एक सौ के करीब परिवार है, जिनकी जनसंख्या लगभग 600 के करीब है। स्थानीय लोगों में से होशियार सिंह, रोहित, कमलेश, विशाल, ओम, रिशु और अजय का कहना है कि सडक़ न होने से बहुत से बीमार लोगों को समय पर इलाज मुहैया नहीं होता है। लोगों को पीठ पर और पालकी में उठा कर लाना पड़ता है।
मौजूदा समय में गांव का एक बुजूर्ग दंपति परिवार बीमार है, वह चल नहीं सकते है, उनके ईलाज के लिए उनको सडक़ तक हर बार उठा के लाना और घर वापिस ले जाना पड़ता है। लोग समय पर न मिलने पर पालकी में उठाना भी असंभव है। उन्होंने बताया कि कई मरीजों को भी समय पर ईलाज न मिलने से दुखद मृत्यु हो गई है।
गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक आने जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं घर बनाने सहित अन्य कार्यों के लिए सामान ढोने का भी आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जिसके कारण विकास की गति भी थम गई है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ बनाने के लिए सभी मंत्रियों विधायकों और सांसद व पीएम तक को पत्राचार किया गया। विभिन्न सरकारों में रहते हुए विधायक-मंत्रियों ने दौरे करवाए गए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि चुनावों के समय सभी प्रत्याशी इस गांव का दौरा कर रहे हैं, परंतु जितने के बाद गांव के लिए कुछ भी नहीं करते हैं। गांव के कई लोग सडक़ की आश में गुजर गए है, न जाने कब सडक़ मिलेगी?
विधायक प्राथमिकता में शामिल, कार्य का इंतजार
स्थानीय लोगों व युवाओं ने बताया कि धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया ने गांव का दो बार दौरा किया। इस दौरान लूंटा, खबरोटू चकवन गांव में अढ़ाई से तीन किलोमीटर सडक़ मार्ग को विधायक प्राथमिकता के आधार पर 2021-22 में डाला गया है, जिसके लिए छह करोड़ 15 लाख 35 हज़ार बजट अप्रुव किया गया है। लेकिन अब तक कार्य शुरू न होने से ग्रामीण लोगों में मायूसी है।
