हिमाचल के इस मंदिर को बताया गया है कैलाश जाने का रास्‍ता, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने की थी तपस्‍या

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे 

जिला सिरमौर के नाहन विधानसभा क्षेत्र के आमवाला सैनवाला गांव के समीप पांवटा साहिब-कालाअंब एनएच से दो किलोमीटर दूर प्राचीन शिव मंदिर पौड़ीवाला स्थित है।

पौड़ीवाला शिवालय में शिवरात्रि पर्व पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बताया जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने पौड़ीवाला मंदिर में भगवान शिव की तपस्या की थी। पौड़ीवाला मंदिर को कैलाश जाने का रास्ता बताया गया है।

मंदिर का इतिहास

पौड़ीवाला शिव मंदिर का इतिहास रावण से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए भगवान आशुतोष का तप किया था। तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि यदि वह एक दिन में पांच पौडिय़ां स्वर्ग के लिए बना देगा तो उसे अमरता का वरदान प्रदान किया जाएगा।

रावण ने पहली पौड़ी हरिद्वार, दूसरी पौड़ी पौड़ीवाला में, तीसरी चूड़धार में और चौथी कैलाश में बनाई। जब रावण पांचवीं पौड़ी बना रहा था तो उसे नींद आ गई। जब वह जागा तो सुबह हो चुकी थी।

यह है मंदिर की मान्यता

मान्यता अनुसार एक बार भगवान शंकर स्वर्ग जा रहे थे तो उन्होंने पहला पांव हर की पौड़ी हरिद्वार, दूसरा पांव जिला मुख्यालय नाहन के पौड़ीवाला, तीसरा पांव चूड़धार और चौथा पांव किन्नर कैलाश पर्वत पर रखा था। तभी से पौड़ीवाला में स्वयंभू शिवलिंग की उत्पत्ति मानी जाती है।

पौड़ीवाला शिव मंदिर का शिवलिंग प्रत्येक शिवरात्रि को एक जौ के दाने के बराबर बढ़ता है। पौड़ीवाला शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता वर्ष भर लगा रहता है। खासकर शिवरात्रि व सावन के दौरान तो यहां बहुत भीड़ रहती है।

वर्षभर पहुंचते हैं शिव भक्‍त

शिव बाबा पौड़ीवाला मंदिर कमेटी के अध्‍यक्ष अमनदीप तोमर का कहना है पौड़ीवाला शिव मंदिर में शिवरात्रि तथा सावन के महीने में श्रद्धालु गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यहां पर श्रद्धालुओं के लिए कमेटी की ओर से भंडारे का प्रबंध भी किया जाता है। वर्ष भर लोग यहां पर दूर-दूर से भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं।

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