
हमीरपुर- अनिल कपलेश
जिला में बूस्टर डोज लगवाने को लेकर लोग खास रूचि नहीं दिखा रहे। फ्रंटलाइन वर्कर्स तथा 60 साल आयु वर्ग से अधिक के लोगों को बूस्टर डोज लगाई जा रही है। बूस्टर डोज लगाने का अभी तक मात्र 30 फीसदी के लगभग ही लक्ष्य हासिल हो पाया है। इसका मुख्य कारण लोगों द्वारा वैक्सीनेशन का तीसरा टीका लगवाने की तरफ कम रुझान माना जा रहा है।
वही इसका एक बड़ा कारण हमीरपुर जिला में लगातार फैल रहा संक्रमण माना जा रहा है। हमीरपुर जिला में कोरोना स्प्रेड हो चुका है जिस कारण बुजुर्ग घरों से बाहर निकलना उचित नहीं समझ रहे। यही एक बड़ा कारण माना जा रहा है कि बूस्टर डोज लगाने का लक्ष्य अभी मात्र 30 फीसदी के लगभग ही पहुंच सका है।
वहीं स्वास्थ्य महकमे ने भी 15 से लेकर 18 साल आयु वर्ग के बच्चों की वैक्सीनेशन को अधिक तबज्जो दी है ताकि बच्चे संक्रमण की चपेट में आने से होने वाले शारीरिक नुकसान से बच सकें। हालांकि बुजुर्गों को लगने वाली बूस्टर डोज की गति में अब तेजी लाई जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आरके अग्निहोत्री का कहना है कि फरवरी महीने में बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाने का अभियान तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 15 से लेकर 18 साल आयु वर्ग के बच्चों को वैक्सीनेशन करने पर अधिक फोकस किया गया था। हालांकि फ्रंटलाइन वर्कर्स तथा 60 साल आयु वर्ग से अधिक के लोगों को भी बूस्टर डोज लगाई गई है।
संक्रमण ज्यादा बढ़ जाने के कारण बुजुर्ग टीकाकरण को लेकर ज्यादा सजगता नहीं दिखा रहे। फरवरी महीने में बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाने का अभियान तेज किया जाएगा। वैक्सीनेशन की यह तीसरी खुराक इसलिए दी जा रही है ताकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। फरवरी महीने में अधिकांश योग्य बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाई जाएगी।
