
नूरपुर- देवांश राजपूत
क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जाच्छ ( नूरपुर) में पालमपुर के बागवानों के लिए फलों की कांट छांट की आधुनिक तकनीकों पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बागवानों को आम, अमरुद, लीची, नींबू प्रजातीय फलों तथा अनार के बारे में विशेष रूप से जानकारी दी गई।
संस्थान के वैज्ञानिक डा राजेश कलेर ने प्रतिभागी किसानों को फलों की सघन खेती में उपयोगी काट छांट के विभिन्न तरीकों से अवगत करवाया। इनके अतिरिक्त डा धर्मेंद्र कुमार, डा रेनू कपूर, डा विश्व गौरव चंदेल व डा विपन गुलेरिया ने भी किसानों को इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न फलों को उगाने के बारे में जैसे जलवायु, मृदा, पोषक तत्त्व तथा फसलों में आने वाले कीट पतंगों व उनके उपचार तथा बगीचों में फलों के साथ लगाने वाली अन्य सब्जियों तथा वानिकी फसलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
किसानों को अनुसंधान केंद्र के उच्च घनत्व अमरुद और आम के बगीचे तथा नर्सरी में भी घुमा कर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को विषय वाद विशेषज्ञ उद्यान विभाग पालमपुर द्वारा एकीकृत औद्यानिकी विकास मिशन के तहत प्रायोजित किया गया और कार्यक्रम में पालमपुर के बीस किसानों ने भाग लिया। बागवानों की अगुवाई कर रहे उद्यान प्रसार अधिकारी डा लवलीत राणा ने बताया की यह किसान वर्तमान में शिवा मिशन के अंतर्गत भी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।
अनुसंधान संस्थान के सह- निदेशक डा अतुल गुप्ता के अनुसार हिमाचल के निचले क्षेत्रों में आधुनिक बागवानी पर और अधिक जोर दिए जाने की जरूरत है ताकि लोग इस व्यवसाय से अधिक से अधिक लाभ उठा सकें। इस कार्यक्रम के दौरान किसानों व वैज्ञानिकों के मध्य परस्पर संवाद में औद्यानिकी की फसलों तथा आधुनिक तकनीक से कृषकों की आय बढ़ने पर भी विचार किया गया।
