
मंडी/पांगी – अजय सूर्या
जनजातीय क्षेत्र पांगी में जुकारू उत्सव के समापन अवसर पर चार प्रजामंडलो ने बहरालू मेला मनाया। इसे पंगवाली भाषा में मेई मेले के नाम से भी जाना जाता है।
जुकारू के 12 दिनों तक चार प्रजामंडलो के लोग एक दूसरे की पंचायतो में नहीं जाएंगे। 12 दिनों के बाद पुर्थी में जब मेला होता है।
उसी दौरान चारो पंचायतो के लोग एक दुसरे के साथ मिलते हैं। रेई और शौर से रथ यात्रा निकाली गई। सुबह 6ः00 मलासनी माता मंदिर पुर्थी में थांदल और पुर्थी की प्रजा लकड़ी से बनी कुकड़ी (माता का खिलौना) की सजावट करते हैं।
उसे 9ः00 बजे रथ यात्रा के लिए तैयार किया जाता है। जिस घर की छत में यह मेला मनाया जाता है। वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानों राजा की पूजा की जाती है।
मलासनी माता मंदिर के पुजारी भूरी सिंह, पूर्ण चंद और श्रीकंठ ने बताया कि मेले के खत्म होने के अगले दिन रविवार सुबह माता के खिलौने कुकड़ी को मेले स्थल से वापिस लाया जाता है।
कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी। लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है।
