
सिहुन्ता – अनिल संबियाल
प्रदेश में दो जिले पिछड़े हुए माने जाते हैं जिनमें एक चम्बा है। चम्बा के 5 विधानसभा क्षेत्रों में हर पञ्चवर्षीय योजना में भट्टियात को छोड़ कर अन्य 04 में किसी न किसी के पास ‘चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से था’ मन्त्री पद रहा है। भट्टियात, चम्बा के कई आन्तरिक राजनीतिक सरोकारों या संघर्षों की वजह से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से प्रायः वञ्चित ही छूटता रहा।
जहाँ तक स्मरण आ रहा है; भट्टियात को, किशोरी लाल वैद्य ‘जिनका भट्टियात से राजनीतिक सरोकार ही अधिक था’ के बाद स्वतन्त्र मन्त्रालय का प्रतिनिधित्व नहीं मिला और जो कुछ मिला उसे स्वतन्त्र दायित्व तो नहीं ही कहा जा सकता।
फिर भी, भट्टियात ने उन्हीं परोक्ष नियन्त्रित ओहदों से सन्तुष्ट रहकर प्रदेश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहने की कोशिश तो की पर उसे इसमें पर्याप्त सफलता इसलिए नहीं मिल पाई.
क्योंकि काम की मञ्जूरी के लिए वह परोक्ष नियन्त्रित होने से परतन्त्रता से मिलने वाले अभावों में ही समय बिताने को बाध्य होता रहा अथवा शीर्षों द्वारा किया जाता रहा। एक लम्बी अवधि तक तो बागडोर ही योग्यता के अभाव से ग्रस्त रही।
भाग्य से इस बार राजनीतिक समीकरण जिस रूप में उजागर हुए हैं वे भट्टियात के हित में बना हुआ ऐसा प्राकृतिक संयोग प्रतीत होते हैं.
जिनका एक पहलू सीधे तौर पर उसके गृहजिला के खाते या हिस्से के मन्त्रीपद से भी जुड़ता हुआ प्रतीत होता है; जिससे ‘अनुभव, योग्यता और वरीयता को देखते हुए’ उसे वञ्चित भी नहीं रखा जा सकता।
काम तो प्रत्येक सम्माननीय ही होता है परन्तु महत्वपूर्ण तो यह है कि उसे पात्र द्वारा किया जा रहा हो या वह पात्र को दिया गया हो। चर्चाएं तो बहुत प्रकार की उठ रही हैं पर, अध्यक्ष अथवा Speaker चम्बा की निहायत आवश्यकता प्रतीत नहीं होती क्योंकि इसके लिए और वयोवृद्ध भी हैं।
चम्बा की योग्यता और उसके हक की समझ शीर्ष को समय से होनी आवश्यक है। वैसे इस बार तो कुदरत ने भी चम्बा जिला की ओर से भट्टियात को स्वतन्त्र जिम्मेदारी दिए जाने के लिए हक के द्वार खोले हैं.
क्योंकि प्राकृतिक आपदा से चम्बा के भट्टियात में जो पिछड़ापन आया है उसे कुछ हद तक पटरी पर लाने के लिए भट्टियात को प्रदेश सरकार में स्वतन्त्र मन्त्रालय का जिम्मा देकर भट्टियात के साथ-साथ पूरे चम्बा को उपकृत किया जा सकता है।
चम्बा के खाते के अनिवार्य मन्त्री पद को अध्यक्ष या Speaker में बदलने की चर्चाओं पर रोकथाम जरूरी है। माँग या चर्चा तो केवल एक मन्त्रालय की स्वतन्त्र जिम्मेदारी दिए जाने की होनी चाहिए.
क्योंकि 1998 के बाद से भट्टियात को स्वतन्त्र मन्त्रालय कभी मिला ही नहीं और शीर्ष Congress की ओर से भट्टियात को मन्त्री पद की जिम्मेदारी भट्टियात की जनता भी लगभग भूल चुकी है कि यह आखिरी बार कब मिला था ?
अतः इस बार का प्राकृतिक संयोग चम्बा के खाते से भट्टियात के लिए मन्त्री पद की विशेष पहचान प्रदेश सरकार की संसद् में चाहता है।
