एक साल से जान जोखिम में डालकर कालेज पहुंच रहे शिक्षक व विद्यार्थी

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शिमला – जसपाल ठाकुर

ठियोग महाविद्यालय को जाने वाली एकमात्र सड़क को ध्वस्त हुए एक साल से अधिक समय हो चुका है। इसके बावजूद जिला व स्थानीय प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है। इस वजह से रोजाना सैकड़ों विद्यार्थी व शिक्षक जान जोखिम में डालकर कालेज पहुंचने के लिए मजबूर हैं।

कालेज को जाने वाली एकमात्र सड़क के ऊपरी हिस्से से भूस्खलन होने और निचली तरफ से ठियोग-हाटकोटी बाईपास की खोदाई की वजह से डंगा खिसकने के कारण कालेज व स्थानीय कालोनी तक जाने वाली सड़क टूट चुकी है।

रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं, कालेज का स्टाफ और स्थानीय निवासी मजबूरन सड़क के इस हिस्से को पार करते हैं। इस हिस्से के ऊपरी तरफ से पत्थरों के गिरने का सिलसिला बना रहता है जिनकी चपेट में आने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस सड़क को बनवाने और विद्यार्थियों को सुरक्षित रास्ता मुहैया करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सड़क के नीचे कालोनी है, जब बरसात होती है तो कालोनी के निवासी डर के साये में रहते हैं कि किसी भी समय मलबा उनके घरों में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकता है।

लोगों ने इसकी शिकायत संबंधित विभागों से भी की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। सड़क के गिर जाने के कारण स्थानीय कालोनी में रहने वाले लोगों की गाड़ियां दूसरी तरफ फंस गई हैं। सड़क टूट जाने के कारण अग्निकांड या दुर्घटना होने के समय कोई भी वाहन कालेज परिसर तक नहीं पहुंच सकता है।

कालेज में लगभग 1200 विद्यार्थी और स्टाफ के 40 लोग रोजाना आते हैं जिसमें से अधिकतर इसी सड़क से गुजरते हैं। कोई भी दुर्घटना होने की स्थिति में व्यक्ति को पीठ पर उठाकर सड़क तक लाना पड़ सकता है जो जोखिम भरा काम होगा।

ठियोग डिग्री कालेज को एक्सीलेंस कालेज का दर्जा मिला है। इसके लिए कालेज परिसर में विभिन्न विकासात्मक कार्य किए जाने हैं। सड़क टूटने के कारण कोई भी ठेकेदार इन कार्यो को करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। वाहनों के लिए सड़क बंद होने के कारण कोई भी निर्माण कार्य किया जाना संभव नहीं है।

क्या बोले ललिता चंदन, प्राचार्य, डिग्री कालेज ठियोग

सड़क टूटने की समस्या के संबंध में कालेज पीटीएम में कई बार मुद्दा उठाया गया। पिछले साल सड़क टूटने के कारण सभी विकास कार्य ठप पड़े हैं। शिक्षकों व विद्यार्थियों को सड़क के इस हिस्से को पार करके कालेज पहुंचना पड़ता है जो जोखिम भरा है। प्रदेश, जिला व स्थानीय प्रशासन से समस्या के निदान की कई बार लिखित रूप से मांग की गई है।

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