बाबा कांशीराम की स्मृतियां संजोने में अब देरी न हो-कैप्टन संजय

--Advertisement--

Image

घर-घर तिरंगा अभियान के तहत पराशर ने गुरनबाड़ में भेंट किए 528 तिरंगा झंडे

डाडासीबा – शिव गुलेरिया 

कैप्टन संजय ने घर-घर तिरंगा अभियान का आगाज महान स्वतंत्रता सेनानी बाबा कांशीराम के निवास स्थान गुरनबाड़ से किया। पराशर बाबा कांशीराम के पुश्तैनी घर में पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर संजय ने गुरनबाड़ पंचायत में घर-जाकर स्थानीय वासियों को 528 तिरंगा झंडे भेंट किए। संजय ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव की पावन बेला पर वह जसवां-परागपुर क्षेत्र की अन्य पंचायतों में भी इस अभियान के तहत घर-घर तक तिरंगा पहुंचाने की व्यवस्था करेंगे।

पराशर ने बाबा कांशी राम के मकान को विरासती स्मारक की घोषणा के लिए प्रदेश सरकार का अभार का जताया और साथ में कहा कि आजादी के इस परवाने की स्मृतियां संजाेने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

संजय ने कहा कि घर-घर तिरंगा अभियान के तहत राष्ट्र के हर व्यक्ति को इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। हम सभी के लिए यह गौरव और हर्ष के क्षण हैं कि इस वर्ष राष्ट्र आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है।

पराशर ने कहा कि इसी के मद्देनजर उन्होंने इस अभियान के तहत जसवां-परागपुर क्षेत्र के गांवों व घरों तक तिरंगा पहुंचाने के लिए गुरनबाड़ गांव से कार्यक्रम का शुभारंभ किया है।

कहा कि राष्ट्र भक्त बाबा कांशीराम उनके लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत व मार्गदर्शक रहे हैं।पिछले वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर उन्हाेंने स्वाणा गांव से बाबा कांशीराम के निवास स्थान तक पद यात्रा की थी।

संजय ने कहा कि पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ क्रांतिकारी साहित्यकार भी थे। उन्होंने काव्य से सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी।

उन्होंने कहा कि बाबा कांशीराम ने जन साधारण की भाषा में चेतना का संदेश दिया। बाबा कांशीराम की रचनाओं में जनजागरण की प्रमुख धाराओं के अतिरिक्त छुआछुत उन्मूलन, धर्म के प्रति आस्था, विश्वबंधुत्व व मानव धर्म के दर्शन होते हैं।

अमृत महोत्सव के मौके पर हम सभी को उनकी शिक्षाओं व देश की आजादी में दिए गए योगदान से सीख लेने की आवश्यकता है।

संजय ने कहा कि डाडासीबा क्षेत्र सही मायनों में बाबा कांशीराम की जन्मस्थली व तपोस्थली रहा है, ऐसे में कम से कम इस स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर जो सरकारी संस्थान चल रहे हैं, उनमें सुविधाओं की कमी नहीं होनी चाहिए।

पराशर ने कहा कि डाडासीबा कॉलेज का नामकरण बाबा कांशीराम के नाम पर किया गया है, लेकिन वहां स्टाफ का अभाव है और विद्यार्थियों का भविष्य इसी कारण दांव पर लगा हुआ है।

संजय ने कहा कि देश की आजादी के प्रर्वतक बाबा कांशीराम के नाम का हर किसी को ख्याल रखा जाना चाहिए और भविष्य में किसी भी योजना का नामकरण बाबा के नाम पर होता है तो उसमें हर सुविधा का समावेश होना चाहिए।

पराशर ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि बाबा कांशीराम के पैतृक घर को अधिग्रहण करके स्मारक का निर्माण किया जाएगा, लेकिन एक सवाल यह भी मन में यह भी है कि क्यों इस महान विभूति के लिए सम्मान इतनी देर से मिलने जा रहा है।

पराशर ने बाबा कांशीराम के गांव गुरनबाड़ में बुधवार को देर शाम तक घर-घर जाकर तिरंगा झंडे स्थानीय वासियों को भेंट किए।

इस अवसर पर बाबा कांशीराम के पौत्र विनोद शर्मा, पंचायत प्रधान वंदना देवी, वार्ड पंच विजय, राकेश सूद, बलदेव सिंह और वरूण भी उपिस्थत रहे।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

20 मार्च को द्रोणाचार्य कॉलेज में लगेगा “रक्त महादान” शिविर

20 मार्च को द्रोणाचार्य कॉलेज में लगेगा “रक्त महादान”...

नॉर्थ इंडिया पावरलिफ्टिंग 2026 में सोहबित राजपूत ने जीता रजत पदक

नॉर्थ इंडिया पावरलिफ्टिंग 2026 में सोहबित राजपूत ने जीता...