
दुराना- राजेश कुमार
भूतपूर्व सैनिक एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुरक्षा एवं शोर्य के रूप में सेना हर देश की एक प्रमुख हस्ती होती है। अतः सेना के शोर्य एवं हस्ती पर तहर तरह के प्रयोग करना सेना के अस्तित्व एवं देश की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है।
पूर्व सैनिक साधू राम राणा का कहना है कि जब कोई युवा सेना में भर्ती होता है तो उसका यह सपना भी होता है कि वह सेना में अच्छा प्रदर्शन करते हुए कोई बड़ा रैंक लेकर सेवानिवृत्त होगा और इस सोच को लेकर सेना में भर्ती हुआ युवा बहुत ही अनुशासित होकर अपने वरिष्ठ को मान सम्मान देते हुए अपने चरित्र का ध्यान रखते हुए बड़ी निष्ठा से कार्य करता है।
रैंक के आधार पर निर्धारित सेवाकाल को पूरा करते हुए पैंशन प्राप्ति करते हुए बहुत ही मान सम्मान से सेवानिवृत्त होता है। लेकिन अगिनवीर भर्ती प्रक्रिया के आधीन भर्ती होने वाले युवा निराशा भरी उम्मीद के साथ सेना में भर्ती होंगे और अल्पमत निर्धारित अवधि में भविष्य की चिंता को लेकर ड्युटी नहीं बल्कि बोझ समझ कर पूरा करते हुए फिर वे रोजगारी की लाइन में खड़े हो जाएंगे।
अतः केंद्र सरकार से मांग की जाती है इस भर्ती नीति पर पुनर्विचार करते हुए युवाओं के भविष्य एवं सेना के शौर्य की गरिमा का मान सम्मान को सुरक्षित रखते हुए इस भर्ती नीति को सेना में लागू करने से पहले सेना के महत्व को देखें और समझें ना कि सेना को एक अनुबंध आधार पर चलाने का प्रयोग करते हुए सेना की ताकत को दुश्मन के आगे कमजोर दिखाने जैसी योजनाओं को धरातल पर लागू करने की भूल करें।
अगर केंद्र सरकार को ऐसी भर्ती सेना में लागू करनी ही है तो सेना की मौजुदा व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ ना करते हुए अलग से टैरीटोरियल आर्मी के आकार की भांति अलग बिंग का नाम देते हुए भर्ती प्रक्रिया शुरू करते हुए इस भर्ती नीति में भर्ती हुए युवाओं को निर्धारित अवधि उपरांत डीएससी एवं पैरामिलिट्री सर्विसेज सहित राज्य पुलिस भर्ती में वरियता दी जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित एवं सम्मान जनक बना रहे और भारतीय सेना के शौर्य की गरिमा भी बनी रहे।
