
मेडीकल कैंप में चेक अप के बाद हुआ बुजुर्ग की आंखों का निशुल्क अापरेशन
देहरा – शिव गुलेरिया
यूं तो मानव शरीर में सभी अंगों का अपना महत्व है, लेकिन शारीरिक इंद्रियों में आंखों का अपना ही महत्व है। दुनिया के दीदार का भी एकमात्र जरिया भी आंखें ही हैं।
मानव शरीर और प्रकृति के इस नायाब तोहफे में कोई खराबी आ जाए तो उजली जिंदगी में भी अंधेरा छा जाता है। जसवां-परागपुर क्षेत्र की बठरा पंचायत की बुजुर्ग उर्मिला को आंखों में मोतियाबिंद आ जाने से दिखना बंद हो गया था। लेकिन कैप्टन संजय की बदौलत उर्मिला की जिंदगी में फिर से उजाला आ गया है।
उर्मिला अब अपनी आंखों से प्रकृति की खूबसूरती को निहार रही हैं तो टेलीविजन देखने की शौकीन यह बुजुर्ग अपने मनपसंदीदा कार्यक्रम भी नियमित रूप से देख रही हैं।
दरअसल जसवां-परागपुर और आसपास के छह विधानसभा क्षेत्रों में कैप्टन संजय द्वारा आयोजित किए गए मेडीकल कैंप स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुए हैं। पराशर की ओर से लगाए गए स्वास्थ्य शिविराें में कई गरीब लोगों ने अपनी आंखों का उपचार करवाया है।
बठरा के वार्ड नम्बर चार की उर्मिला ने बताया कि उन्हें कुछ वर्ष पूर्व आंखों में मोतियाबिंद आ गया था। इससे देखने में परेशानी हो रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पति और दोनों बेटे किसी तरह गुजारा चलाकर परिवार को भरण-पोषण का काम करते है।
उनकी कमाई इतनी नहीं है कि आंखों का ऑपरेशन करवा सकें। उर्मिला ने बताया कि बीते जनवरी माह में उन्हें किसी ने बताया कि संजय पराशर के सौजन्य से साथ लगती पंचायत लग में मेडीकल कैंप का आयोजन हो रहा है। इसके बाद वह 17 जनवरी को मेडीकल कैंप में पहुंचीं।
वहां, नेत्र रोग विशेषज्ञों ने आंखों की जांच करने के बाद ऑपरेशन करवाने की सलाह दी और कैंप में ही दवाईयां भी उपलब्ध करवाईं। इसके बाद पराशर की टीम ने ऑपरेशन करवाने के लिए फोन किया और गांव में वाहन भेजने की व्यवस्था की। इस दौरान भोजन की व्यवस्था भी संजय द्वारा की गई थी।
आंखों की चेक अप से लेकर ऑपरेशन होने तक उनका कोई पैसा खर्च नहीं हुआ। ऑपरेशन के वक्त पराशर खुद उनका हाल जानने के लिए अस्पताल में पहुंचे हुए थे। ऑपरेशन होने के बाद भी संजय पराशर की टीम उनके साथ लगातार संपर्क में रही है।
पराशर द्वारा नजर का विशेष प्रकार का चश्मा भी उनके घर में पहुंचाया गया है। उर्मिला ने कहा कि ऑपरेशन होने के बाद उन्हें वह अपने आस-पास ही हर चीज को देख सकती है और घर के भी छोटे-मोटे काम कर लेती हैं।
बड़ी बात है कि उम्र के इस पड़ाव पर वह अपने काम खुद ही करती हैं। पहले टीवी देखने में भी परेशानी होती थी। मगर अब साफ दिखता है। पराशर के कारण अब समाचार और धार्मिक कार्यक्रम देख पाती हैं।
उर्मिला ने जीवन में फिर से उजाला लाने के लिए पराशर का आभार जताया है। वहीं, कैप्टन संजय ने कहा कि वह खुद को खुशनसीब मानते है, जो ईश्वर ने उन्हें बुजुर्गों की सेवा का मौका दिया।
