प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में पहाड़ों को छलनी करने बात; खड्ड में फेंक रहे मलबा, मचा हडक़ंप
हिमखबर डेस्क
कांगड़ा जिला के परौर स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास द्वारा किए जा रहे विस्तार कार्यों में पर्यावरणीय कानूनों को पूरी तरह दरकिनार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले माह एनजीटी में जो रिपोर्ट सौंपी है, वह किसी डरावने सच से कम नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, न केवल पहाड़ों की कटाई की गई है बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी अपूरणीय क्षति पहुंचाई गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संयुक्त समिति की जांच में यह खुलासा हुआ है कि निर्माण कार्य से निकला भारी मलबा सीधे ताहल खड्ड और शी नाले जैसे प्राकृतिक जलधाराओं में फेंका गया।
जल शक्ति विभाग की रिपोर्ट ने इस घटना की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी है कि मलबे के कारण इन जलधाराओं की दिशा बदलने की कोशिश की गई है। जांचकर्ताओं ने पाया कि नालों के किनारों पर कचरे का अंबार लगा है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है, अप्रैल में ही दोबारा हुए निरीक्षण ने सुरक्षा दावों की कलई खोल दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि खड्ड और नालों के किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवारें तकनीकी रूप से बेहद कमजोर हैं।
बरसात में गिर जाएंगे डंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान मलबे के भारी दबाव के आगे ये दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं। बोर्ड ने संगठन को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि वे इन दीवारों को तुरंत मजबूत करें और प्रभावित क्षेत्र की बहाली के लिए एक ठोस कार्ययोजना पेश करें।
35 पेड़ों की अवैध कटाई पर मामूली जुर्माना
जांच रिपोर्ट में 35 हरे-भरे पेड़ों को बिना अनुमति के काटने का गंभीर मुद्दा उठाया है। प्रशासन ने इतने बड़े उल्लंघन पर महज 5,000 रुपए जुर्माना लगाया है, जिसे पेड़ों की लकड़ी के बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम और नाकाफी बताया जा रहा है।
डीसी हेमराज बैरवा बोले, एनजीटी को भेजी रिपोर्ट
जांच में सामने आई खामियों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राधा स्वामी व्यास को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद व्यास प्रबंधन ने एक लाख हर्जाना भी जमा करवा दिया है। उपायुक्त कांगड़ा हेम राज बैरवा का कहना है कि मामला ध्यान में है और संबंधित विभागों की एक टीम गठित कर सारे प्रकरण की जांच रिपोर्ट एनजीटी को भेज दी है।

