शाहपुर: दक्षिण भारतीय शैली में सजा रूलहेड का मलह माता सुकराला मंदिर

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दक्षिण भारतीय शैली में सजा रूलहेड का मलह माता सुकराला मंदिर, आस्था और पर्यटन का अद्भुत संगम, शाहपुर के बोह में विराजती मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी, 400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ा भव्य देवस्थल।

शाहपुर – नितिश पठानियां

देवभूमि हिमाचल के पावन देवस्थलों की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव बोह के समीप रूलहेड में स्थित भव्य मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर की, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, गहरी आस्था और मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य के कारण विशेष पहचान रखता है।

यह भव्य मंदिर दक्षिणी भारत के मंदिरों की तर्ज पर निर्मित किया गया है, जो इसे क्षेत्र के अन्य मंदिरों से अलग और विशिष्ट बनाता है। इसकी नक्काशी, शिल्पकला और स्थापत्य शैली श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ी है मंदिर की कथा

मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय शर्मा के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक लगभग 400 वर्ष पूर्व गौतम ब्राह्मण वंशजों के पूर्वज अपनी कुल देवी माता सुकराला जी के विरावल (जम्मू) स्थित प्राचीन मंदिर से माता का त्रिशूल लेकर बोह पहुंचे थे।

उस समय उनकी इच्छा गांव में माता का मंदिर स्थापित करने की थी, लेकिन कुछ कारणों से यह संकल्प तत्काल साकार नहीं हो पाया।

समय बीतने के साथ इस वंश के पृथ्वीराज शर्मा ने मंदिर निर्माण की पहल की। बाद में उनके पुत्र प्रकाश चंद शर्मा और विजय शर्मा ने श्रद्धालुओं और स्थानीय भक्तों के सहयोग से इस संकल्प को पूर्ण रूप दिया। अंततः वर्ष 2022 में इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ।

उड़ीसा के कारीगरों ने दी अद्भुत शिल्पकारी

मंदिर की भव्यता का एक विशेष पहलू इसकी कलात्मक शिल्पकारी है। मंदिर में नक्काशी और शिल्प निर्माण का कार्य उड़ीसा के कुशल कारीगरों द्वारा किया गया है, जबकि निर्माण में प्रयुक्त पत्थर चंबा से लाए गए हैं।

इसी कारण मंदिर का स्थापत्य स्वरूप दक्षिण भारतीय शैली की झलक देता है, जो हिमाचल की धरती पर एक अनूठा दृश्य प्रस्तुत करता है।

माता की महिमा से जुड़ी चमत्कारिक मान्यता

माता सुकराला जी के नाम और महिमा को लेकर भक्तों के बीच एक अत्यंत रोचक लोककथा प्रचलित है। बताया जाता है कि एक बार चंबा के राजा माता के जम्मू स्थित मंदिर में पहुंचे और उन्होंने प्रश्न किया—

“मैं कैसे मानूं कि आपमें शक्ति है?”

मान्यता है कि उसी समय मंदिर परिसर के समीप खड़ा सूखा लसूड़े का पेड़ अचानक हरा-भरा हो गया। इस चमत्कार के बाद माता की शक्ति और महिमा की चर्चा दूर-दूर तक फैल गई।

मंदिर में विराजमान हैं तीन स्वरूप

वर्तमान में मंदिर में माता सुकराला जी (लक्ष्मी स्वरूप), माता काली जी, माता सरस्वती जी की पवित्र पिंडियां विराजमान हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के तीनों स्वरूपों के दर्शन कर सुख-समृद्धि, शक्ति और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आस्था के साथ प्रकृति का अनुपम संगम

मंदिर के समीप स्थित बोह घाटी का प्राकृतिक झरना (वॉटरफॉल) इस स्थान की सुंदरता को और भी दिव्य बना देता है। इसी कारण यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि उभरता हुआ पर्यटन स्थल भी बन चुका है।

यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु जहां एक ओर माता के चरणों में शीश नवाते हैं, वहीं दूसरी ओर आसपास की प्राकृतिक छटा, पहाड़ी वातावरण और झरने की मधुर ध्वनि से मन को अद्भुत शांति का अनुभव होता है।

आस्था, स्थापत्य और प्रकृति का अद्वितीय संगम

मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर, रूलहेड (बोह) आज श्रद्धा, संस्कृति, लोकविश्वास और स्थापत्य कला का ऐसा अद्भुत संगम बन चुका है, जो आने वाले समय में कांगड़ा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

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