वन अदालत के आदेशों की धज्जियां, जमीन खाली करवाने के इंतजार में बस गया नया गांव

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शिलाई उपमंडल के रोनहाट में वन अदालत के आदेशों की धज्जियां, दरख्त काट कर भूमि पर अवैध कब्जा

सिरमौर – नरेश कुमार राधे

उपमंडल शिलाई के रोनहाट क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे का कब्जा करने मामला प्रकाश में आया है, जिससे वन विभाग के अधिकारियों के भी होश उड़ गए हैं।

वन अदालत ने जिस रकबे को खाली करने के लिए 19 वर्ष पूर्व 2004 में आदेश दिए थे वह रकबा खाली नहीं हुआ, बल्कि कब्जाधारकों ने 15 बीघा और आरक्षित वन भूमि पर कब्जा किया है। उसके पेड़ काट कर उस भूमि पर खेत और मकान बना दिए, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।

वन विभाग की वन अदालत ने वर्ष 2004-05 में रोनहाट के समीप पनोग वन बीट के गुजरोट चीड़ के जंगल के बीच एक व्यक्ति द्वारा वन भूमि पर कब्जा पाया तथा वन अदालत ने कब्जाधारक को बेदखल करने के आदेश जारी किए थे।

वन विभाग ने कब्जाई भूमि आदेश के बावजूद भी खाली नहीं करवाई। वन विभाग की इतनी बड़ी लापरवाही से कब्जाधारकों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि धीरे-धीरे सैकड़ों की तादात में पेड़ काटे गए। वन भूमि पर एक नहीं बल्कि आधा दर्जन लोगों ने बेखौफ कब्जा कर मकान व खेत बना दिए।

बताया जा रहा है कि वन विभाग को पता होते हुए भी इन कब्जाधारकों को नहीं रोका गया, जिसकी वजह से बीते 19 वर्षों में सैकड़ों चीड़ के पेड़ काटे गए। रोनहाट वन खंड की चौकी से यह जगह मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है, जहां वन भूमि पर कब्जा कर मकान व खेत बनाए गए हैं। लगभग 15 से 20 बीघा भूमि पर कब्जा हो गया है। -एचडीएम

जल्द करवाएंगे निशानदेही

वन परिक्षेत्र अधिकारी शिलाई पलक मेहता ने बताया कि उन्हें एक कब्जाधारक की फाइल कार्यालय में मिली है, जिसमें वर्ष 2004-05 में वन भूमि को खाली करने के आदेश हुए थे। भूमि विभाग ने क्यों खाली नहीं करवाई इस बारे में उन्हें कोई मालूम नहीं है।

उस व्यक्ति के विरुद्ध जल्द ही पुलिस में मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसी के साथ लगती वन भूमि पर भी कब्जा हुआ है उसका पता निशानदेही के बाद लगेगा। उन्होंने राजस्व विभाग को निशानदेही की अर्जी दी है।

विभाग की लापरवाही से लोगों ने बनाए नए घर-खेत

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वन विभाग के कर्मियों की मिलीभगत के चलते यह कब्जा हुआ है। यही नहीं, विभाग के कर्मियों और अधिकारियों की शह पर दोबारा कब्जा करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई, जबकि नियमानुसार री इन क्लोजमेंट करने वाले कब्जाधारकों के विरुद्ध पुलिस में मामला दर्ज करना अनिवार्य है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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