
आखिर क्यों हो रहे हिमाचल के तेज तरार अधिकारी टारगेट? क्या माफिया को दिया जा रहा समर्थन?
हिमखबर – डेस्क
हिमाचल में आज एक तरफ सरकार हिमाचल खनन माफिया, लैंड माफिया, अवैध कारोबार, चलाने वालों के कारोबार करने वाले लोगों पर रोज कार्रवाई करने के नए – नए आदेश दे रही है लेकिन हाल ही में हिमाचल में 11 डीएसपी स्थानांतरित किए गए।
जिसमें सारे डीएसपी नौजवान डीएसपी थे। जिन्होंने किसी भी दल की सरकार के नेताओ के दवाब में नहीं आकर खनन माफिया, लैंड माफिया आदि माफियाओं की कमर तोड़ी। ऐसा ही वाकया आज हिमाचल के जिला ऊना मैं कार्यरत डीएसपी अंकित शर्मा को ट्रांसफर करने के बाद देखने को मिला।
अंकित शर्मा एक ऐसे नौजवान डीएसपी हैं। जिन्होंने अलग – अलग डिविजन में रहकर खनन माफिया, लैंड माफिया की कमर तोड़ी और आम जन के सहयोग से अपराधियों को और गलत काम करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।
डीएसपी अंकित शर्मा ने बाथु ब्लास्ट पटाका फैक्ट्री ऊना में एक एस आई टी का हिस्सा बने और 1 हफ्ते के अंदर ही डीएसपी अंकित ने अपराधियों को मुंबई से उठाया और ऊना पुलिस के सुपुर्द किया।
पेपर लीक कॉन्स्टेबल मामला जो कि भाजपा के शासनकाल में हुआ। उसमें भी डीएसपी अंकित शर्मा एसआईटी का हिस्सा बने। किसी के दबाव में ना आकर 35 दिन बाहर रहकर अलग-अलग राज्यों में अपराधियों को पकड़ कर सलाखों के पीछे किया।
पुणे के दोपहर में गोली कांड जो हुआ। उसमें डीएसपी अंकित शर्मा के नेतृत्व में 19 दिनों में 10 अपराधियों को पकड़ कर सलाखों के पीछे किया। चुनावों के दौरान हिमाचल में सबसे बड़ी खेप डीएसपी अंकित शर्मा ने पकड़ी। जिसमें 750 पेटी शराब पकड़ी। चुनावों में भी निष्पक्ष होकर काम किया।
हाल ही में नई सरकार बनी और डीएसपी अंकित शर्मा ने जोर-शोर से अब खनन माफियाओं के उपर शिकंजा कसने की तैयारी की। लेकिन दुर्भाग्य से उनका ट्रांसफर कर दिया गया। ट्रांसफर का क्या कारण रहा यह तो हिमाचल सरकार जानती है लेकिन आज उन्हें राजनीति का शिकार होना पड़ा।
बड़ा सवाल यह है कि अंकित शर्मा बीजेपी शासन काल में बद्दी, देहरा, ऊना जैसी जगहों पर डीएसपी रहे और बड़े बड़े माफियाओं अपराधियों की कमर तोड़ी। मीडिया के कुछ पत्रकारों ने भी यह माना है कि अगर क्षेत्र में कोई हरकत होती थी तो डीएसपी अंकित को क्राइम के ऊपर बताया जाता था तो अंकित शर्मा एकदम एक्शन लेकर कार्यवाही करते थे। सरकार अधिकारियों और लोगों के लिए नहीं बल्कि नेताओं के लिए बदली चाहिए।
अधिकारियों को दी जा रही अच्छी जगह लेकिन तेज तरार अधिकारियों को बटालियन में लगाकर उनका शोषण किया जा रहा।
यह कथन सत्य है कि हिमाचल में सरकार सत्ता परिवर्तन के लिए तो बदल ली थी लेकिन अधिकारियों का परिवर्तन भी ऐसा होगा? आमजन या अधिकारियों ने नहीं सोचा था। बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या सरकार ही नहीं चाहती है की खनन माफिया, लैंड, शराब माफिया, माफियाओं के ऊपर काबिल ऑफिसरो को लगाया जाया ताकि माफियाओं को रोका जाए।
हिमाचल सरकार ने बड़े जोर शोर से कहा था कि सरकार बदली, सत्ता बदली, शासन व्यवस्था बदली
हिमाचल की नई सरकार ने कहा कि तेज तरार अधिकारियों को लगाकर खनन माफिया लैंड माफिया की कमर को तोड़ा जाएगा लेकिन अब इसके उलट ही सरकार का रवैया है और हर रोज नौजवान अधिकारियों के ट्रांसफर करके उन्हें बटालियन में धकेला जा रहा है।
क्या सरकार खुद ऐसे अधिकारियों को बदलकर माफियाओं का साथ देना चाहती है। यह बहुत बड़ा सवाल है। आज डीएसपी अंकित शर्मा सोशल मीडिया पर जोर शोर से सबकी पहली पसंद बने हैं। सोशल मीडिया पर हिमाचल सरकार की किरकिरी भी होने लगी है लेकिन हिमाचल सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगी।
ऐसा ही चलता रहा तो नौजवान अधिकारी जो राजनीति का शिकार हो रहे हैं। वह कभी भी स्वतंत्र होकर काम नहीं कर पा रहे हैं। इस हिसाब से माफियाओं का हर तरह से व्यापार चलता रहेगा। उन्ना जिला एक ऐसा जिला है जहां पर हिमाचल का ही नहीं, पंजाब तक के खनन माफिया हावी हैं। जिनकी कमर अंकित शर्मा ने तोड़ी थी।
लेकिन दुखद राजनीति का शिकार अंकित शर्मा आज बसी बटालियन ट्रांसफर कर दिया गया ताकि कुछ नेताओं की शह पर उन्ना में खनन माफिया को प्रोत्साहित या प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह दिखती हुई बात है क्योंकि सरकार अपने चहेते अधिकारियों को लगाकर अपनी साख बचाने में लगी हुई है।
अंकित शर्मा जैसे डीएसपी जो कि अमेरिका में पढ़ाई करके आए हैं। उनका मनोबल तोड़ कर उन्हें बटालियन जैसी ड्यूटी दी जा रही है। आज अंकित का कोई नेता या बड़ा अधिकारी साथ नहीं दे रहा लेकिन सोशल मीडिया पर आम जनता के हमदर्द रहे अंकित शर्मा के लिए दर्द उमड़ रहा है और सरकार की किरकिरी धीरे-धीरे होने लगी है।
