
चम्बा – भूषण गूरूंग
पारदर्शिता लाने वाले हिमाचल सरकार के दावे के तहत मनरेगा में ऑनलाइन हाजरी के निर्णय को पंचायत प्रतिनिधियों ने विकास में बाधा बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की बात कही।
प्रधान-उपप्रधान यूनियन भट्टियात के मुताबिक सरकार ने बिना होमवर्क के यह फरमान लागू कर दिया जबकि इससे पहले पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देना जरूरी था।
इस निर्णय को लेकर विकास खंड भट्टियात की प्रधान-उपप्रधान यूनियन ने एसडीएम भट्टियात को ज्ञापन सौंपा।
उनका कहना है कि पिछले करीब 5 दिनों से किसी भी मस्टरोल पर दो बार हाजरी नहीं लग पाई है, जिसका मतलब है कि सारी लेबर गैरहाजिर है, जबकि लेबर 9 से 2 बजे तक काम कर रही है।
ऐसे में इनकी अदायगी का कौन जिम्मेवार होगा। वहीं उन्होंने मजदूरी को 350 से 400 तक भी किए जाने की मांग की।
बताते चलें कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की हाजिरी नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर (एनएमएमएस) के माध्यम से लगाना सुनिश्चित किया गया है।
सरकार की ओर से मनरेगा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उक्त निर्णय लिया गया है। अब इस एप के माध्यम से मजदूरों को दिन में तीन बार हाजिरी लगाने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन सरकार के इस निर्णय के विरोध में कई पंचायतों के प्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है।
विकास खंड भट्टियात की पंचायतों के प्रधानों, उपप्रधानों और वार्ड सदस्यों ने एसडीएम के माध्यम से पंचायतीराज निदेशक को ज्ञापन भेजा है।
उन्होंने पंचायतीराज निदेशक से मांग की है कि विकास खंड भट्टियात के अधिकतर जनप्रतिनिधियों के पास एनड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं हैं और 20 फीसदी जनप्रतिनिधि अशिक्षित हैं, जिसके कारण मोबाइल एप पर कार्य नहीं कर सकते हैं।
उन्होंने मांग की है कि मनरेगा कार्य को हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर रखते हुए पहले की तरह हाजिरी लगाना सुनिश्चित किया जाए।
