सिरमौर राजघराने में ऐसा पहली बार, गंगा तट पर बेटियों ने दी महाराज उदय प्रकाश को मुखाग्नि

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे 

वैसे राजपाट समाप्त होने के बाद भी राजघरानों में रियासतकाल की रिवायतों को निभाया जाता है। लेकिन सिरमौर रियासत के अंतिम शासक राजेंद्र प्रकाश के दत्तक पुत्र दिवंगत उदय प्रकाश की बेटियों ने ये बात साबित की है कि वो बेटों से कम नहीं है। राज पुरोहित नहीं, बल्कि पिता को स्वयं ही मुखाग्नि देंगी।

वीरवार को पिता के निधन की सूचना मिलते ही बड़ी बेटी नीलेश्वरी कुमारी ने अमेरिका से भारत की उड़ान भरी थी। छोटी बेटी दिव्या श्री भी ये फैसला कर चुकी थी कि पिता के पार्थिव शरीर को बेटियां ही मुखाग्नि देंगी। बेटियों के इस निर्णय पर महारानी रसिका प्रकाश ने भी कोई आपत्ति जाहिर नहीं की।

रिवायत के मुताबिक राज पुरोहित द्वारा मुखाग्नि दी जानी थी। रियासत के वक्त में राजा का बेटा न होने पर राज पुरोहित द्वारा अंतिम संस्कार की परंपरा को निभाया जाता था। लेकिन दिवंगत महाराज उदय प्रकाश की बेटियों ने ये साबित किया….बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं।

गौरतलब है कि दिवंगत उदय प्रकाश की छोटी बेटी दिव्या श्री अपने पिता का संपत्ति को सहेजने में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देती रही है। 11 जनवरी 1913 को जन्में अंतिम शासक राजेंद्र प्रकाश ने 1933 में रियासत की गद्दी को संभाल लिया था।

गौरतलब है कि अंतिम शासक राजेंद्र प्रकाश का निधन भी देहरादून में ही हुआ था। लेकिन अंतिम संस्कार नाहन के पौड़ीवाला में किया गया था। 2011 में रियासत के वंशजों के बीच संपत्ति का विवाद सुलझा था।

दिवंगत महाराज उदय प्रकाश के बाद महारानी रसिका प्रकाश के साथ-साथ बेटियां उनकी संपत्ति की वारिस बनी हैं। इसमें सिरमौर रियासत के शाही महल का करीब-करीब आधा हिस्सा भी शामिल है।

सिरमौर रियासत के राजघराने के सदस्य कंवर अजय बहादुर सिंह का कहना है कि परिवार में ऐसा पहली बार हुआ है, जब बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी हो।

उन्होंने बताया कि अंतिम शासक को राज पुरोहित द्वारा मुखाग्नि दी गई थी। कंवर अजय बहादुर सिंह ने कहा कि बदलते समय में बेटियों ने ये साबित किया है कि वो बेटों से कम नहीं होती।

बता दें कि नाहन से भी काफी संख्या में लोग महाराज उदय प्रकाश की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। दोपहर बाद अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को गंगा जी में प्रवाहित कर दिया गया।

हाल ही में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में पांच बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया था। साथ ही मुखाग्नि भी दी थी।

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