हिमखबर डेस्क
वृंदावन से सामने आए ताजा हादसे ने एक बार फिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, नाव में सवार श्रद्धालुओं द्वारा लाइफ जैकेट न पहनने के कारण यह दुखद घटना घटी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। यह हादसा न केवल लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों को भी सामने लाता है।
स्थानीय सामाजिक संस्था ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वे लंबे समय से श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाते आ रहे हैं। संस्था का कहना है कि चाहे हरिद्वार हो, वृंदावन या फिर अन्य धार्मिक स्थल—जहां भी श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा या खतरा होता है, वे हमेशा आगे आकर प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे हैं और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने की मांग की है। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई, लेकिन कई अहम मुद्दे आज भी अनदेखे कर दिए जाते हैं।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसी तरह के हादसे अन्य धार्मिक स्थलों जैसे बाबा बालक नाथ और नैना देवी जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ भी हो सकते हैं।
संस्था ने सभी पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस गंभीर विषय को प्रमुखता से उठाएं, ताकि प्रशासन जागे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा जय सिद्ध योगी सेवा संघ (रजिः) द्वारा उठाया गया यह विषय जन सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण है। गोविंद सागर झील (भाखड़ा बांध) में श्रद्धालुओं की भारी आमद, विशेषकर चैत्र मेलों और नैना देवी यात्रा के दौरान, सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकती है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसके लिए प्रशासन, समाज और संस्थाओं को मिलकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

