प्रो.वेदप्रकाश उपाध्याय ने किया डॉ.राजकुमार शांडिल्य के संस्कृत काव्य का विमोचन

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बिलासपुर, सुभाष चंदेल

पंजाब विश्वविद्यालय के भूतपूर्व अध्यक्ष व राष्ट्रपति पुरुस्कार से पुरस्कृत प्रो.वेद प्रकाश उपाध्याय ने ब्रह्मर्षि योग महाविद्यालय सैक्टर 19 चंडीगढ़ में डॉ.राजकुमार शांडिल्य के संस्कृत काव्य ‘भासते भुवि भारतदेश:’ का विमोचन किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय ब्रह्मर्षि मिशन की अध्यक्षा ब्रह्मवादिनी स्वामी कृष्णकांता जी महाराज ने की।

जबकि कार्यक्रम के मुख्यातिथि पंजाब विश्वविद्यालय से प्रो. वीरेन्द्र कुमार अलंकार तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो.विक्रम कुमार विवेकी तथा प्रो. लखबीर सिंह ने शिरकत की।अन्य अतिथियों में आचार्य देवकीनंदन भट्ट,आचार्य दिनेश चन्द्र सेमवाल,डॉ. रमेशचंद शर्मा तथा डॉ. धर्मेन्द्र शास्त्री आदि संस्कृत प्रेमी विद्वानों ने कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. केशवदेव जी ने किया।

ब्रह्मर्षि योग महाविद्यालय की संस्थापक प्राचार्या व अध्यक्षा स्वामी डॉ.मनीषा जी ने सारस्वत अतिथि के रूप में अपने आशीर्वचनों से कृतार्थ किया।बताते चलें कि जिला बिलासपुर के अन्तर्गत कस्बा के अंतर्गत गुग्गा गेहड़वीं ग्राम में पैदा हुए हिन्दी तथा संस्कृत भाषा के विद्वान डॉ. राजकुमार शांडिल्य पिछले 32 वर्षों से अध्यापन तथा लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं।

वर्तमान में चण्डीगढ़ शिक्षा विभाग में हिन्दी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं।यह ग्रन्थ सात शीर्षकों तथा 700 श्लोकों में हिन्दी अनुवाद सहित रचित है।इसमें देवस्तुति के पश्चात जीवन के लिए उपयोगी बातें,स्त्री (नारी) की महत्ता तथा दशा,नशा प्रवृत्ति के दुष्प्रभावों के बारे में बताया है।

विश्वनेता यशस्वी प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के व्यक्तित्व तथा उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा के साथ ही उनके दीर्घायुष्य तथा नैरुज्य की कामना भी की गई है।काश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों तथा प्राकृतिक दृश्यों का मनोहारी वर्णन किया है।भारतवर्ष की आत्मा गंगा,हिमालय तथा राममंदिर आदि की स्तुति तथा महत्ता का वर्णन किया गया है।

वर्षभर की छ: ऋतुओं,उत्सवों, महापुरुषों तथा शिक्षा व्यवस्था का भी वर्णन किया गया है।बहादुर सैनिकों,कृषकों तथा वैज्ञानिकों को नमन करते हुए प्रदूषण जैसी समस्या से बचने के लिए वृक्षों के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला गया है।’सभी भाषाओं की जननी संस्कृत आज भी समाज को दिशा देने तथा दशा सुधारने में समर्थ है’ यह ग्रंथ इस तथ्य को भी सिद्ध करता है।

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