पंचतत्व में विलीन हुए शहीद पुष्पेंद्र नेगी, तिरंगे में लिपटा देख बेसुध हुए माता-पिता

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हिमखबर डेस्क

देश सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले किन्नौर के थैमगारंग पंचायत के 29 वर्षीय नायक पुष्पेंद्र नेगी वीरवार को अपने पैतृक गांव में पंचतत्व में विलीन हो गए। असम में ड्यूटी के दौरान बलिदान हुए इस वीर सपूत को सेना के जवानों ने सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।

जैसे ही पुष्पेंद्र की पार्थिव देह गांव पहुंची तो बुजुर्ग माता-पिता बेटे को इस हालत में देखकर बेसुध हो गए। समूचा क्षेत्र शोक में डूब गया। हर कोई इस युवा वीर को अंतिम विदाई देने पहुंचा। सांगला तहसील के थैमगारंग गांव में जब नायक पुष्पेंद्र का पार्थिव शरीर पहुंचा तो हर आंख नम हो उठी।

ग्रामीणों, परिजनों और रिश्तेदारों ने रोते हुए अपने वीर बेटे को अंतिम बार निहारा। पुष्पेंद्र के बलिदान की खबर ने न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि समूचे किन्नौर को गहरे दुख में डाल दिया। गौरतलब है कि उनकी पार्थिव देह को असम से दिल्ली, फिर चंडीगढ़ लाया गया। वहां से सेना के वाहन द्वारा थैमगारंग गांव पहुंचाया गया।

बता दें कि 19 डोगरा रेजीमेंट में तैनात पुष्पेंद्र नेगी असम में सेवाएं दे रहे थे। ड्यूटी के दौरान तेज हवाओं में पेड़ की टहनियों की चपेट में आने से उनका आकस्मिक निधन हो गया। पुष्पेंद्र अपने पीछे माता सरला देवी, पिता महेंद्र नेगी, पत्नी कीर्ति नेगी और एक छह वर्षीय बेटे एतिक को बिलखता छोड़ गए हैं। पुष्पेंद्र का असमय जाना न सिर्फ उनके परिजनों के लिए, बल्कि समूचे किन्नौर के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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