NSUI की दो टूक, जब तक वैक्सीन नहीं, तब तक प्रदेश में न हों परीक्षाएं

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व्यूरो, रिपोर्ट

एनएसयूआइ के राज्य सचिव रजत सिंह राणा ने कहा कि सरकार को इस समय किसी भी प्रकार की परीक्षा करवाने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। प्रदेश में धीरे-धीरे कोविड-19 के केस कम हो रहे हैं जो की अच्छी बात है। इस महामारी को पहले जड़ से खत्म कर लिया जाना चाहिए। उसी के बाद भीड़ जुटाने और परीक्षाएं करवाने जैसी बातों पर सोचना चाहिए।

राणा ने यह भी कहा कि पहले हर एक छात्र की वैक्सिनेशन करवाना सरकार का दायित्व होना चाहिए। उसी के बाद परीक्षाएं करवानी चाहिए। 31 मई को आख़री स्लॉट लगा था, अगला कब लगेगा किसी को मालूम नहीं, मगर जयराम ठाकुर को तो सिर्फ 2022 में अपनी कुर्सी बचाने की पड़ी है। कोरोना महामारी के प्रकोप से सभी बखूबी वाकिफ है और वैज्ञानिकों द्वारा कोरोना की तीसरी लहर आने की बात को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्तिथि में अब किसी भी प्रकार से जान माल को जोखिम में डालना मूर्खता होगी।

परीक्षाएं करवाने से भी बड़े मुद्दे अभी शिक्षा ओर रोजगार जगत में बचे हुए है जिन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। जिनमें यूआइआइटी में फीस की जो लूट मची है जिस पर छात्रों को प्रशासन द्वारा 15 जून तक फीस जमा करवाने के लिए धमकाया जा रहा है। उस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और डीएलएड कमीशन का परिणाम दो सालो से नहीं आया है ये मुद्दे मुख्य है। राणा ने कहा हमारा छात्र संगठन साफ साफ सरकार को कह रहा कि जब तक वेक्सिन नहीं, तब तक एग्जाम नहीं”।

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