हिमखबर डेस्क
जिला मुख्यालय मंडी से करीब 80 किलोमीटर दूर द्रंग क्षेत्र की दुर्गम चौहाघाटी में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कथोग पिछले कई सालों से शिक्षकीय कमी से जूझ रहा है।
हालात ऐसे हैं कि स्कूल में न तो प्राधानाचार्य तैनात है और न ही किसी विषय का प्रवक्ता, जिससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
वर्तमान में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन का दावा तो जरूर कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कथोग का यह स्कूल वर्ष 2015 में अपग्रेड होकर सीनियर सेकेंडरी बना था, ताकि दूर-दराज के बच्चों को गांव के नजदीक ही बेहतर शिक्षा मिल सके।
जिसके बाद साल 2019 तक यहां प्रवक्ता अपनी सेवाएं देते रहें। लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे यहां से शिक्षकों का तबादला होता रहा।
शिक्षा खंड द्रंग -2 के अंतर्गत यह स्कूल आता है और यहां ये भी बता दें कि इस क्षेत्र का पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कौल सिंह ठाकुर कई सालों तक प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

छात्रों के भविष्य को अंधकार में जाता देख बुधवार को स्कूल एसएमसी प्रधान भवन ठाकुर की अगुवाई में अभिभावकों का एक प्रतिनिधि मण्डल उच्च शिक्षा उप निदेशक मंडी यशवीर धीमान से मिला और विभाग व सरकार से खाली पड़े पदों को जल्द भरने की मांग उठाई।
एसएमसी प्रधान भवन ठाकुर के बोल
इस मौके पर एसएमसी प्रधान भवन ठाकुर ने बताया कि कई वर्षों से प्राधानाचार्य, प्रवक्ता और अन्य आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल साइंस प्रवक्ता का पद 4 साल, इतिहास प्रवक्ता 3 साल, हिंदी प्रवक्ता 3 साल, अंग्रेजी विषय प्रवक्ता 4 साल, प्रवक्ता आईपी 9 साल और कला अध्यापक का पद पिछले 16 सालों से रिक्त चला है।
क्षेत्र में खतरनाक जंगली रास्ते होने के कारण वे अपने बच्चों का अन्य स्कूलों में भी दाखिला नहीं करवा सकते हैं। क्योंकि क्षेत्र के अन्य स्कूल उनके गांव से 8 से 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं।
शिक्षा उप निदेशक बोले रोटेशन में भेजे जाएंगे शिक्षक
वहीं जब इस बारे में शिक्षा उप निदेशक यशवीर धीमान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूलों में रिक्त पड़े पदों के बारे में शिक्षा निदेशालय को पहले ही अवगत कराया गया है।
कथोग स्कूल में फिलहाल उन्होंने रोटेशन के तौर पर प्रवक्तों की डयूटी लगा दी है। अगले माह से हिंदी और अंग्रेंजी विषय के प्रवक्ता सप्ताह में तीन दिन यहां पर बच्चों को पढ़ाएंगे।
इसके बाद अन्य विषय के प्रवक्ता की भी डेप्यूटेशन पर बारी-बारी तब तक अपनी सेवाएं देंगे, जब तक यहां शिक्षकों की स्थायी तैनाती नहीं हो जाती।

