हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सरकार ने निर्विरोध पंचायतें चुनने पर फोकस किया है। राज्य के मंत्री और विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय होकर लोगों से निर्विरोध पंचायत कार्यकारिणी चुनने की अपील कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि यदि पंचायतें निर्विरोध चुनी जाती हैं तो इससे न केवल चुनावी खर्च में कमी आएगी, बल्कि आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिलेगा।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने अपने क्षेत्रों में निर्विरोध पंचायतों के गठन को लेकर पहल करते हुए सार्वजनिक रूप से इसका एलान भी किया है।

दोनों नेताओं ने स्थानीय लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख व्यक्तियों के साथ बैठकों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि गांवों के विकास के लिए आपसी सहमति से प्रतिनिधियों का चयन किया जाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
सरकार की इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए विधायक इन दिनों अपने-अपने क्षेत्रों के दौरे पर हैं। किसी भी समारोह में जाकर लोगों से निर्विरोध चुनाव के फायदे समझा रहे हैं।
निर्विरोध पंचायतों के चयन से जहां स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कम होगी, वहीं विकास कार्यों में तेजी आने की संभावना भी बढ़ेगी। हालांकि, कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं और मानते हैं कि चुनाव में प्रतिस्पर्धा भी जरूरी होती है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मंत्री और विधायकों के यह प्रयास किस हद तक सफल हो पाता है, फिलहाल गांव में पंचायत चुनावों को लेकर माहौल बनता जा रहा है।

