115 चुनाव चिन्हों पर होगा पंचायतों का दंगल, राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचित किए चुनाव चिन्ह

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश में चुनाव रोस्टर जारी होने के बाद अब कभी भी चुनावी दंगल की तिथि तय हो सकती है। प्रदेश भर में होने वाले चुनावी दंगल के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायतों में वार्ड सदस्यों से लेकर उपप्रधान, प्रधान, बीडीसी और जिला परिषद सदस्यों के लिए 115 चुनाव चिन्ह अधिसूचित कर दिए गए हैं।

इनमें अधिक उम्मीदवार होने की स्थिति में अलग से 15 चुनाव चिन्ह अधिसूचित किए हैं। वहीं, नगर पालिका के चुनाव के लिए 20 चुनाव चिन्ह अधिसूचित किए गए हैं। पंचायतीराज संस्थाओं के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव चिन्ह उम्मीदवारों को आबंटित कर दिए जाएंगे।

राज्य चुनाव आयोग ने भी पंचायत के वार्ड सदस्यों से लेकर जिला परिषद सदस्यों के लिए 20-20 चुनाव चिन्ह अधिसूचित किए हैं।,लेकिन उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने पर 15 अतिरिक्त चुनाव चिन्ह भी साथ ही में अधिसूचित किए गए हैं।

बीडीसी के लिए चुनाव चिन्ह

हिमाचल प्रदेश में बीडीसी सदस्य लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिन्ह अधिसूचित किए हैं। इनमें सेब, चढ़ता सूरज, रेडियो, बल्ला, सीढ़ी, कार, कुर्सी, पतंग, वायुयान, छत का पंखा, नगाड़ा, मोमबत्ती, हॉकी और गेंद, शीशे का मर्तवान, ग्लोब, चम्मच, तरबूज, गुब्बारा, फावड़ा व मैच बॉक्स पर मोहर लगाकर बीडीसी का चुनाव होगा।

अतिरिक्त चुनाव चिह्न

पंचायतीराज संस्थाओं के लिए अधिक उम्मीदवार होने की स्थिति में राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही 15 चुनाव चिन्ह अधिसूचित किए हैं। इसमें चारपाई, पेन, छड़ी, फूलों की टोकरी, फावड़ा और बेलचा, दो तलवारें और ढाल, खिडक़ी, ऊन, स्लेट, डोली, ब्रीफकेस, लेडी पर्स, फ्रॉक, ब्रशव नल शामिल हैं।

प्रधान के लिए ज्यादा दावेदारी

हिमाचल में पंचायती राज चुनावों में लोगों की सबसे ज्यादा रुचि रहती है। आम जनता पंचायत प्रतिनिधियों को चुनने के लिए उत्साहपूर्वक हिस्सा लेती है। इन चुनावों को लेकर कई महीने पहले से ही सियासी हलचल शुरू हो जाती है। चुनाव लडऩे के इच्छुक लोग पंचायत स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाने में जुट जाते हैं।

खासकर पंचायत का प्रधान और उपप्रधान बनना प्रतिष्ठा और प्रभाव का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि सबसे ज्यादा लोग इन पदों के लिए दावेदारी पेश करते हैं। प्रधान का पद न केवल सम्मानजनक होता है, बल्कि इससे सामाजिक प्रभाव भी बढ़ता है।

प्रधान को गांव के विकास कार्यों, योजनाओं और संसाधनों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका मिलती है, जिससे उसे निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त होता है. इसके अलावा, यह पद स्थानीय राजनीति में पहला कदम माना जाता है। कई लोग इसे विधायक या सांसद बनने की सीढ़ी के रूप में देखते हैं।

कौन लड़ सकता है चुनाव

ग्राम पंचायत के लिए प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों के चुनाव होते हैं। प्रधान और उपप्रधान का चुनाव लडऩे के लिए दावेदारी जताने वाला व्यक्ति संबंधित पंचायत का वोटर होना जरूरी है। इसी तरह से संबंधित पंचायत का वोटर अपने वार्ड से सदस्य का चुनाव लड़ सकता है।

पंचायत समिति का चुनाव लडऩे वाला दावेदार संबंधित ब्लॉक के तहत किसी भी पंचायत का वोटर होना चाहिए। जिला परिषद सदस्य का चुनाव लडऩे के लिए दावेदार उस जिला परिषद वार्ड का वोटर होना चाहिए। पंचायतीराज संस्थाओं का चुनाव लडऩे किए उम्मीदवार की आयु 21 साल होनी चाहिए।

पंचायतीराज संस्थाओं का वार्ड सदस्य, उप प्रधान, प्रधान, पंचायत समिति सदस्य व जिला परिषद सदस्य का चुनाव लडऩे के लिए शैक्षणिक योग्यता का कोई मापदंड तय नहीं है। निरक्षर व्यक्ति भी पंचायतीराज संस्थाओं का चुनाव लड़ सकता है।

इन इलेक्शन सिंबल पर चुने जाएंगे वार्ड मेंबर

हिमाचल में सबसे ज्यादा वार्ड सदस्यों पद के लिए चुनाव होता है। जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने कुल 20 चुनाव चिन्ह निर्धारित किए हैं। इसमें आम, लेटर बॉक्स, सिलाई मशीन, मेज, ट्रैक्टर, प्रेशर कुकर, चांद, बिजली का बल्ब, गुडिय़ा, अलमारी, कैमरा, बेंच, दो तबले, नाचती गुडिय़ा, ठेला गाड़ी, सब्जी की टोकरी, सारंगी, श्याम पट्ट, फसल काटता किसान व मशाल शामिल हैं।

टेलीविजन सहित इन चुनाव चिन्हों पर चुने जाएंगे उपप्रधान

हिमाचल प्रदेश में उपप्रधान के लिए भी एक पद के लिए औसतन पांच से सात उम्मीदवार खड़े होते हैं। इनके लिए चुनाव चिन्ह तय किए गए हैं। इनमें टेलीविजन, तारा, बस, पिल्लर हीटर, गैस सिलेंडर, नाव, पुस्तक, हैट, शीशे का गिलास, बल्लेबाज, बांसुरी, केतली, दरवाजा, बिजली का खंभा, मक्की, कांटा, फ्राई पैन, कीबोर्ड, अनाज पिछोरता हुआ किसान व हेलमेट पर मोहर लगाकर उपप्रधान चुने जाएंगे।

प्रधान पद के लिए 20 निशान

हिमाचल में चुनावों के दौरान पंचायतों में प्रधान पद के लिए लोगों की सबसे अधिक रुचि रहती है। इसलिए इस पद के लिए सबसे अधिक दावेदारी जताई जाती है। प्रधान पद के लिए हाथ की घड़ी, धनुष बाण, गैस का चूल्हा, गाजर, जग, समुद्री जहाज, रेल का इंजन, नारियल का पेड़, टेबल लैंप, ट्रक, पुल, कंघी, किला, गोंद की बोतल, हारमोनियम, दीवार घड़ी, रोड रोलर, ईंट, लिफाफा व अंगूर चुनाव चिन्ह अधिसूचित किए गए हैं।

जिला परिषद को इतने चिह्न

प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के लिए सबसे अधिक संख्या में रोमांच जिला परिषद सदस्यों के लिए होता है। जिला परिषद वार्ड के तहत कई पंचायतें पड़ती हैं। इनके लिए चुनाव चिन्ह तय किए गए हैं। वहीं, जिला परिषद सदस्य के लिए ताला और चाबी, मेज का पंखा, छाता, जीप, कप प्लेट, फुटबॉल, ढोलक, हैंडपंप, नाशपत्ती, संदूक, सिपाही, अंगूठी, मोटर साइकिल, सीटी, घंटी, कैंची, केला, पेंसिल, बाल्टी व हीरा चुनाव चिन्ह फाइनल किए गए हैं।

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