कांगड़ा की 429 पंचायतों में महिला प्रधान, एससी, एसटी और ओबीसी को मिला आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व
हिमखबर डेस्क
मिनी संसद कही जाने वाली ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होते ही राजनीतिक सगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में सर्वाधिक पंचायतों वाले कांगड़ा जिला में सबसे अधिक महिला प्रधान चुन कर आएंगी। आरक्षण रोस्टर जारी होने के साथ ही गांव गांव में संभावित प्रत्याशियों ने अपनी अपनी चुनाव ताल ठोंक कर माहौल गर्मा दिया है।
कांगड़ा जिला में आगामी पंचायती राज चुनावों के मद्देनजर पंचायत प्रधान पदों के आरक्षण की अधिसूचना जिला प्रशासन ने जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार जिले की कुल 847 पंचायतों में 429 पंचायत प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
यह आंकड़ा जिले में ग्रामीण नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विकास खंड वार आरक्षण की बात करें तो बैजनाथ विकास खंड की 45 पंचायतों में से 23 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
बड़ोह खंड की 21 पंचायतों में 11, भवारना खंड की 31 पंचायतों में 16 और देहरा ब्लॉक की 59 पंचायतों में से 30 पद महिलाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। धर्मशाला विकास खंड की 31 पंचायतों में से 16, फतेहपुर की 54 में से 27 और इंदौरा खंड की 58 में से 29 पंचायतें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।

विकास खंड कांगड़ा की 48 पंचायतों में 24, लंबागांव की 51 में से 27 और नगरोटा बगवां विकास खंड की 35 पंचायतों में से 18 पद महिलाओं के लिए सुरक्षित किए गए हैं। नगरोटा सूरियां की 55 में से 28, नूरपुर की 52 में से 26 और पालमपुर की 40 पंचायतों में 20,पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त पंचरुखी की 30 में से 15, प्रागपुर की 63 में से 32, रैत की 64 में से 32, सुलाह विकास खंड की 49 में से 25 और सुराणी की 60 पंचायतों में 30 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। जिला प्रशासन ने इन आदेशों को तुरंत प्रभाव से लागू करते हुए सभी संबंधित कार्यालयों में नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने के निर्देश दे दिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस आरक्षण से पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और ग्रामीण नेतृत्व में उनकी सक्रियता को बल मिलेगा। इतना ही नहीं एससी, एसटी और ओवीसी वर्गों को भी नियमानुशार बरावर आरक्षण रोस्टर में स्थान दिया गया है।

