प्राकृतिक खेती, एमएसपी में बढ़ोतरी और किसान आयोग गठन से सशक्त होंगे किसान: केवल सिंह पठानियां

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हिमखबर डेस्क

उप मुख्य सचेतक एवं शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानियां ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठा रही है। उप मुख्य सचेतक ने बुधवार को एक दिवसीय कुल्लू दौरे में यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि तथा किसान आयोग के गठन जैसे निर्णय प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देंगे। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में लगभग 2 लाख 23 हजार किसान करीब 38 हजार 455 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और गेहूं, मक्का, जौ व हल्दी जैसी फसलों की मार्केटिंग भी शुरू हो चुकी है।

सरकार अब इन उत्पादों की गुणवत्ता और पोषण मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक लैब सुविधाएं विकसित करने जा रही है। इसके तहत 16 गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं में हाई-सेंसिटिव उपकरण स्थापित किए जाएंगे और एक समर्पित मार्केटिंग सेल का गठन किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक उत्पादों को प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सके।

पठानियां ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। गेहूं का एमएसपी 60 से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का 40 से 50 रुपये, पांगी घाटी के जौ का एमएसपी 60 से 80 रुपये तथा हल्दी का 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है।

इसके अतिरिक्त पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम एमएसपी देने की घोषणा भी की गई है।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और बाहरी हाइब्रिड बीजों पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार “बीज गांव” की अवधारणा लागू करेगी।

इसके अंतर्गत 50 से 100 किसानों के समूह पारंपरिक बीजों का उत्पादन करेंगे और चयनित गांवों में सामुदायिक बीज बैंक स्थापित किए जाएंगे। जलवायु अनुकूल फसलों जैसे देसी मक्का, मसूर, लाल चावल, कोदा, अदरक, राजमा व माश पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बीज उत्पादकों को 5 हजार रुपये प्रति बीघा की सब्सिडी तथा प्रत्येक बीज गांव को 2 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता देने का प्रावधान किया गया है, जिससे सौर ऊर्जा आधारित और नमी नियंत्रित भंडारण इकाइयों का निर्माण किया जा सके।

उन्होंने कहा कि किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए राज्य में “हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग” का गठन का फैसला भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ऐतिहासिक पहल है, जो किसानों की समस्याओं के समाधान और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रभावी मंच बनेगा।

पठानियां ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश कृषि क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा।

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