हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा फीस वृद्धि के विरोधी में SFI का धरना प्रदर्शन

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हिमखबर डेस्क

एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा 28 मार्च 2026 को ई सी की बैठक में हुए फीस वृद्धि के निर्णय का साफ तौर पर विरोध करती है । एसएफआई का यह मानना है कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा छात्र विरोधी फैसला लिया गया है।

एसएफआई का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 10 से 15 प्रतिशत तक फीस वृद्धि की गई है तथा विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आने वाले महाविद्यालय में इससे भी अधिक तक फीस वृद्धि की गई है यह निर्णय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों को शिक्षा से दूर करने का काम करेगा तथा उच्च शिक्षा की पहुंच को कम करेगा । इसके अलावा भी पेपर की फीस में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है जो साफ साफ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की मंशा को दिखाता है।

एसएफआई ने कहा कि जिस उद्देश्य के साथ विश्वविद्यालय का निर्माण किया गया था आज पूरी तरह से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय उसके विपरीत काम कर रहा है विश्वविद्यालय का निर्माण उच्च शिक्षा तक की पहुंच को पहुंचाने के लिए किया गया था लेकिन इस तरह के फैसलों से उसे शिक्षा में काफी ज्यादा गिरावट आएगी । गरीब तथा मध्यम वर्ग के परिवार शिक्षा को हासिल नहीं कर पाएंगे ।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को मिलने वाले बजट में कटौती की गई है जिसके चलते आय के संसाधन उत्पन्न करने के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा फीस वृद्धि की गई लेकिन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सालाना 90 करोड़ रुपय के आसपास फीसों से एकत्र करता है लेकिन छात्रों को कक्षाएं तक उपलब्ध करवाने में असमर्थ है । छात्रों को उनकी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने में असमर्थ है ।

एसएफआई का साफ तौर पर कहना है कि शिक्षा छात्रों का अधिकार है लेकिन आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा इसे एक व्यापार बना दिया गया है फीस वृद्धि करके हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय कर रहा है उन्हें शिक्षा से दूर करने का काम कर रहा है छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने का काम कर रहा है हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों की जेबों से फीस के नाम पर लूट की जा रही है ।

एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का कहना है यदि विश्वविद्यालय द्वारा इस फीस वृद्धि के फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में एसएफआई पूरे विश्वविद्यालय और प्रदेश के छात्रों को लामबंद करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगी जिसका जिम्मेवार विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार होगी ।

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