औछी सियासत से लगातार प्रभावित हो रही कांगड़ा घाटी रेल सेवा
हिमखबर डेस्क
पठानकोट से बैजनाथ पपरोला-जोगिंद्रनगर तक चलने वाली ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी रेल को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है, जिससे क्षेत्र के लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय जनता का मानना है कि इस अहम रेल सेवा को राजनीतिक मुद्दा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे सीधे तौर पर आम लोगों की सुविधाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
यह रेलवे लाइन केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि हिमाचल और पंजाब के हजारों लोगों की जीवनरेखा है। प्रतिदिन छात्र, कर्मचारी, व्यापारी, मरीज और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इसी ट्रेन के माध्यम से अपने जरूरी कार्यों के लिए सफर करते हैं। ऐसे में इसके संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा या बदलाव आम जनता पर सीधा असर डालता है, जो पिछले चार साल से बंद पड़ी है। आज जरूरत राजनीति करने की नहीं, बल्कि विकास और समाधान की है।
कांगड़ा रेलवे को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना जनता के साथ अन्याय है। सरकार और रेल मंत्रालय को चाहिए कि वह जनभावनाओं का सम्मान करे और इस महत्त्वपूर्ण रेल सेवा को मजबूत बनाकर आम लोगों को राहत प्रदान करे। कांगड़ा ट्रेन केवल एक रेल सेवा नहीं, बल्कि जनता की आवाज, जरूरत और धरोहर है, इसे राजनीति का शिकार नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
पठानकोट में रेलवे फाटक बंद होने से होने वाली असुविधा को आधार बनाकर ट्रेन हटाने की बात को लोग पूरी तरह गलत और पक्षपातपूर्ण बता रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस पूरे रेल मार्ग पर लगभग 15 फटक हैं और हर स्थान पर ट्रेन गुजरने के दौरान फाटक बंद होते हैं।
टे्रन को पठानकोट से हटाने की चर्चा पर विरोध
हाल ही में रेल मंत्रालय स्तर पर इस ट्रेन को पठानकोट के बजाय डलहौजी रोड स्टेशन से चलाने की चर्चाओं ने विवाद को जन्म दिया है। साथ ही कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से लोगों में रोष बढ़ गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वर्षों से पठानकोट इस रेल सेवा का प्रमुख प्रारंभिक केंद्र रहा है और इसे बदलना जनता की सुविधाओं पर सीधा प्रहार होगा।
समाधान विकास में, न कि सेवा बंद करने में
जनता का स्पष्ट मत है कि यदि कहीं ट्रैफिक जाम की समस्या है, तो उसका समाधान ट्रेन को हटाना, नहीं बल्कि अंडरपास और फ्लाईओवर जैसे स्थायी विकास कार्य करना होना चाहिए। खासतौर पर पंचरुखी या अन्य आ क्षेत्र में भारी ट्रैफिक के बावजूद लोगों ने कभी इस ट्रेन का विरोध नहीं किया।
राजनीति पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ नेता अपने निजी स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उछाल रहे हैं। यहां तक कि क्षेत्र के सांसदों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि चार-चार सांसद होने के बावजूद इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं हो पा रही है। जनता में यह भावना भी उभर रही है कि सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं और आम जनता की समस्याएं नजरअंदाज की जा रही हैं।

