हिमखबर डेस्क
विश्व में मंडराते युद्ध के बादलों के बीच भारतीय सेना की नई ताकत रोबोट बनेगें। मंडी आईआईटी में तैयार किए जा रहे ये रोबोट ये रोबोट हाई अल्टीट्यूड में अपनी ताकत का लोहा मनवाने के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं, जो सेना के जवानों का जोखिम कम करने में मददगार होंगे। मंडी आईआईटी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर आधुनिक रोबोट बनाने पर काम कर रही है।
नेशनल रोबोटिक्स मिशन के तहत लक्ष्य तय किया गया है कि 2030 तक भारत रोबोट तकनीक में ग्लोबल लीडर बन सके। इस तकनीक में अमरीका और चीन के साथ भारत टॉप-5 में कदम रखने को ऐसे रोबोट तैयार कर रहा है, जो भारतीय सीमाओं की चौकसी कर सरहदों को सुरक्षित बना दे।
इस रोबोटिक्स तकनीक का शोध मंडी आईआईटी में सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स लैब में किया जा रहा है। सीएआईआर में बने रोबोट लेह, लद्दाख, जे एंड के सहित पर्वतीय क्षेत्रों में सेना के जवानों का जोखिम कम करने के लिए आधुनिक तकनीक से लेस किए जा रहे हैं।
आईआईटी मंडी में विभिन्न प्रकार के रोबोट विकसित किए जा रहे हैं। इनमें मोबाइल रोबोट, ह्यूमनॉइड (मानवाकृति) रोबोट और कुछ औद्योगिक प्रकार के रोबोट शामिल हैं। यह मुख्य रूप से अनुसंधान और प्रयोगात्मक उद्देश्यों के लिए बनाए जा रहे हैं। एआई आधारित रोबोटिक प्रणालियों का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा में प्रभावी रूप से किया जा सकता है। ये गश्त, निगरानी और अन्य रक्षा संबंधी कार्यों में सहायता कर सकते हैं।
ऐसे में भारतीय सीमाओं पर सुरक्षा तंत्र और मजबूत होगा। उन्नत रोबोटिक्स शोध से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। आईआईटी मंडी में रोबोटिक्स के क्षेत्र में डा. अमित शुक्ला, डा. नरेंद्र के.धर, डा.जगदीश कडियम, डा.दीपक रैना, प्रो.दीपांकर देब और डा.राधे श्याम शर्मा शोध कर रहे हैं। ये वैज्ञानिक रोबोट तकनीक विकसित कर रहे हैं।
गुजरात आईआईटी के रोबोट फील्ड ट्रायल्स पर
गुजरात आईआईटी से निकले समान रोबोट्स पोल ट्रैवर्सल और एआई सर्विलांस वाले भारतीय सेना में फील्ड ट्रायल्स पर हैं। मंडी में बने रोबोट हाई अल्टीट्यूड टेक्नोलॉजी से लेस होकर हिमाचल, जम्मू कश्मीर सहित पूर्वोत्तर सीमाओं के लिए उपयुक्त हैं। राष्ट्रीय रणनीति में नेशनल सिक्योरिटी को प्राथमिकता दी गई है।
आसान हो जाएगा सैनिकों का काम
मंडी आईआईटी में सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स लैब के चेयरपर्सन डाक्टर नरेंद्र के धर कहते हैं कि यह शोध न सिर्फ तकनीकी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए हैं। भविष्य में ये रोबोट्स सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखेंगे। ये सीमाओं की रक्षा करते हुए जीवन को आसान बनाने के काबिल होंगे।

