हिमखबर डेस्क
केंद्र ने बेशक मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी योजना लागू कर दी हो, लेकिन हिमाचल में मनरेगा के सोशल आडिट में खामियां मिली हैं।
हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में पेश सोशल ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2024-25 के दौरान 1.94 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। ये रिपोर्ट बजट सत्र में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की ओर से सदन में रखी गई है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि योजना को लेकर लोगों में जागरूकता का स्तर बेहद कम है और शिकायत निवारण तंत्र भी कमजोर बना हुआ है।
राज्य के सभी 12 जिलों में दो चरणों में किए गए ऑडिट के दौरान 17,470 मामले सामने आए। पहले चरण में 3,606 और दूसरे चरण में 3,232 ग्राम पंचायतों को कवर किया गया।
इनमें से 9,674 मामलों की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) पोर्टल पर अपलोड की गई, लेकिन केवल 2,417 मामलों का ही संतोषजनक निपटारा हो सका।
रिपोर्ट के अनुसार 5,813 मामलों में 1,94,35,251 रुपए की हेराफेरी पाई गई। अब तक 45.67 लाख रुपए की वसूली की गई है, जबकि 31.49 लाख रुपए के मामलों को खारिज किया गया है। गड़बडिय़ों में बिना काम किए भुगतान, फर्जी बिल और कागजों में खर्च दिखाने जैसे मामले शामिल हैं।
मजदूरी से जुड़े मामलों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। 1,914 मामलों में काम न करने वालों को भुगतान किया गया, जबकि 1,181 मामलों में पंचायत प्रतिनिधियों और उनके परिजनों को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।
इसके अलावा 1,023 मामलों में एक ही दिन में दो बार भुगतान और 583 मामलों में फर्जी प्रविष्टियों के जरिए धन का दुरुपयोग सामने आया है।
इस रिपोर्ट में 1,316 मामलों में 6.76 करोड़ रुपये की अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। इनमें स्वीकृत राशि से अधिक खर्च, कार्यस्थल के माप और रिकॉर्ड में अंतर तथा जरूरी दस्तावेजों की अनुपलब्धता शामिल है।
प्रक्रिया से संबंधित खामियां भी सामने आई हैं। 8,561 मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिनमें 3,142 स्थानों पर सूचना बोर्ड नहीं लगाए गए और 908 जगहों पर मासिक रोजगार दिवस आयोजित नहीं किया गया। मजदूरों को पे-स्लिप न देने के 366 मामले और जॉब कार्ड उनके पास न होने के 123 मामले भी मिले हैं।
1,780 शिकायतों में से सिर्फ 117 का ही निपटारा
रिपोर्ट के दौरान वर्ष के दौरान 1,780 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन केवल 117 का ही समाधान हो सका। शिकायतों में जॉब कार्ड से जुड़े मुद्दे, न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न होना और कार्यस्थल सुविधाओं की कमी प्रमुख हैं।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि मनरेगा को लेकर आम लोगों में जागरूकता बेहद कम है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में बड़ी बाधा बन रही है। कार्रवाई के तहत 151 कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया गया।
1,650 को चेतावनी दी गई, जबकि एक कर्मचारी को निलंबित और एक को बर्खास्त किया गया। एक मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

