ग्रांट लेने को हमारे साथ चलिए, ताकि डीए-एरियर का भुगतान कर सकें।
हिमखबर डेस्क
विधानसभा में प्वाइंट ऑफ आर्डर के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष सासकी के तहत केंद्र द्वारा जारी किए गए 3920 करोड़ को लेकर एक-दूसरे पर तलख हुए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से मिले 3920 करोड़ लोन हंै, ग्रांट नहीं। विपक्ष के नेता बड़े हल्के तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। वित्त के बारे में वह जानते नहीं।
हमारे पास कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 20 प्रतिशत पैसा आता है और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर हमारा ज्यादा है। इसमें से तीस हजार रुपए तो सैलरी को चला जाता है। फिर हमारे मूलधन को जाता है, ब्याज को जाता है।
उन्होंने कहा कि आरडीजी जो थी, वह एक्सपेंडिचर को वियर करती थी। सीएम ने कहा कि यह हिमाचल की जनता का अधिकार है। तभी मैंने कहा सासकी एक लोन है। पिछले साल भी लिया था।
पिछले साल भी बगैर प्राइड ऑफ बिल के 3400 करोड़ लिया, उससे भी हमने काम चलाया। अब 3900 करोड़ है। अब आप नाम बदलकर हमारी आरडीजी को रोक रहे हैं।
सीएम ने कहा कि आरडीजी हिमाचल के लोगों का राईट है। जो हमें अनटाईड मिलता था, वह हम पेंशन और पे पर खर्च करते थे। सोशल सिक्योरिटी को खर्च करते थे, वह हमें मिलता था।
यह तो अब रिफार्म है, इसमें उन्होंने बोला कि 50 साल के लिए लोन है, ये रिफॉर्म करने पड़ेंगे। आप अप्लाई करेंगे, फिर आपको लोन मिलेगा, यह चला रहता है।
सीएम ने नेता प्रतिपक्ष से कहा कि आप हमारे साथ ग्रांट के लिए चलिए, ताकि कर्मचारियों के कर्मचारियों के जो वेतन है, लोन है, ब्याज है,जो चढ़ा हुआ है, उसके लिए चलिए आरडीजी के लिए चलिए, यह मैं कहना चाहता हूं।
केंद्र से मिली मदद पर धन्यवाद के दो शब्द तक नहीं
जयराम ठाकुर ने सदन में कहा कि केंद्र से मदद मिल रही है और उसके बावजूद धन्यवाद के दो शब्द तक राज्य सरकार नहीं बोल रही है। 3920 करोड़ सासकी के तहत केंद्र ने जारी किया है, उसके लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद।
यह धन केंद्र सरकार ने राज्य के विकास के लिए उपलब्ध करवाया है। यह हिमाचल के लिए 50 साल के लिए बिना ब्याज का लोन है। प्रदेश सरकार को इसका आभारी होना चाहिए। यह लोन है और बिना ब्याज के है। प्रदेश के विकास के लिए योगदान तो है।

