हिमखबर डेस्क
चार साल के कार्यकाल के बाद सेना छोड़ने वाले अग्निवीरों तथा सेना से सेवानिवृत होने वाले सैनिकों के लिए अच्छी खबर है। सेना और रेलवे ने अग्निवीरों तथा सेवा निवृत सैनिकों को दोबारा रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए एक ‘सहयोग ढांचे’ पर सहमति व्यक्त की है।
अग्निवीरों के पहले बैच का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त होने वाला है और इसे देखते हुए सेना तथा रेलवे की यह पहल उन्हें कुछ राहत देने वाली है। सरकार ने अग्निवीरों के लिए दूसरा रोजगार सुनिश्चित करने के लिए इससे पहले केन्द्रीय पुलिस बलों की भर्ती में भी उनके लिए आरक्षण का प्रावधान किया है।
अग्निवीरों को दिल्ली पुलिस में सिपाही की भर्ती में भी 20 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की गई है। इसमें शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट और अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष तक की छूट जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल हैं।
सेना ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक एक पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए इसे रक्षा मंत्रालय तथा रेलवे के बीच सहयोग के मामले में मील का पत्थर बताया है।
पोस्ट में लिखा है, ” भारतीय सेना और भारतीय रेल ने अग्निवीरों और सेना कर्मियों के लिए सेवा निवृत्ति के बाद रोजगार के अवसरों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘सहयोग ढांचा’ शुरू किया है।
भारतीय सेना और रेल मंत्रालय के वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में यह पहल नागरिक सेवाओं में सहज बदलाव को सुगम बनाने, रेलवे में उपलब्ध रोजगार अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के लिए एक उत्तरदायी सहायता तंत्र स्थापित करने का प्रयास है।
यह ढांचा पूर्व सैनिकों को सार्थक द्वितीय करियर प्रदान करने और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
रक्षा मंत्रालय ने जून 2022 में रक्षा क्षेत्र में एक बड़े सुधार के तौर पर सेनाओं में जवानों की नियमित भर्ती बंद करते हुए ‘अग्निपथ’ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती शुरू की थी।
्इस योजना के तहत युवाओं को सेना, नौसेना और वायुसेना में अल्पकालिक संविदात्मक आधार पर भर्ती करने की व्यवस्था की गई थी।
इस ढांचे के तहत अभ्यर्थियों की चार वर्ष की अवधि के लिए भर्ती की जाती है और उन्हें ‘अग्निवीर’ नाम दिया जाता है। शुरू में इनके लिए आयु सीमा 17 से 21 वर्ष थी जिसमें उपरी सीमा को बाद में बढाकर 23 वर्ष तक कर दिया गया।
अग्निवीरों के लिए चार वर्ष की अवधि के दौरान 30,000 से 45,000 रुपए प्रति माह तक के वेतन और लागू भत्तों का प्रावधान किया गया था।
यह भी प्रावधान किया गया है कि चार वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता और संगठनात्मक आवश्यकता के आधार पर नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है।
बाकी बचे 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा समाप्ति पर 11 से 12 लाख रुपए की एकमुश्त वित्तीय राशि, जिसे सामान्यतः ‘सेवा निधि’ कहा जाता है, प्रदान की जाती है। चार वर्ष बाद सेवा छोड़ने वाले अग्निवीरों को पेंशन का लाभ नहीं मिलता।
इस सुधार को सेना में जवानों की औसत आयु कम करने और प्रशिक्षित युवाओं को सैन्य सेवा के बाद अवसरों के लिए कौशल व वित्तीय सहायता प्रदान करने के प्रयास के रूप में पेश किया गया था।

