नयांगल, सोलधा, त्रिलोकपुर के प्रभावित लोगों को एक साल बाद भी नहीं दी गई जमीन

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कोटला – व्यूरो

उप तहसील कोटला के अंतर्गत नयांगल, सोलधा त्रिलोकपुर के जो प्रभावित परिवार 2023 में भारी बरसात के कारण पहाड़ी खिसकने के कारण 13 परिवार के घर जमींदोज हो गए थे और भारी बरसात के कारण त्रिलोकपूर और सोलधा के भी परिवार प्रभावित हुए थे और एक साल वीत जाने पर सरकार द्वारा इनको मकान बनाने के लिए जमीन नहीं दी गई।

जमीन की मांग को लेकर सभी प्रभावित परिवार पिछले सप्ताह डीसी कांगड़ा हेमराज बेरवा से मिले और उन्होंने जमीन देने की मांग की और जिन लोगों के पास जमीन है उन्हें किस्त जारी करने की मांग की ताकि भी अपने घर का निर्माण कर सके। इन सभी परिवारों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

इन सभी परिवारों के सदस्यों को लेकर स्थानीय समाज सेवी प्रदीप शर्मा डीसी कांगड़ा के पास ले गए थे और उन्होंने अपनी सारी समस्या उनके समक्ष रखी डीसी कांगड़ा ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्दी उनको जमीन दी जाएगी और मकान की दूसरी किश्त जारी की जाएगी ।

ये रहे उपस्थित

इस मौके पर प्रभावित परिवारों के सदस्य जोगिंदर सिंह, रघुनाथ, मनमोहन, कुशल, प्रीतम, हरवंस , ज्ञान चंद, प्रभात सिंह, छोटेलाल, सुभाष चंद, खेमराज, धारो राम, कुलदीप, राम सिंह आदि मौजूद रहे।

एसडीएम ज्वाली विचित्र सिंह ठाकुर के बोल

इस मौके पर एसडीएम ज्वाली विचित्र सिंह ठाकुर ने कहा कि नयांगल के 11 परिवारों के केस जिलाधीश कांगड़ा के कार्यालय में लंबित है। और आदेश आने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

डीसी कांगड़ा हेमराज वेरबा के बोल

इस मौके पर डीसी कांगड़ा हेमराज वेरबा से बात की तो उन्होंने बताया कि औपचारिकताएं पूरी होते ही प्रभावितों को भूमि अलैट कर दी जाएगी। और नियमानुसार राहत राशि जारी करने के आदेश एसडीएम ज्वाली को दिए जाएंगे।

1 – सुभाष चंद ने कहा कि पिछले वर्ष से लेकर आज तक परिवार के साथ भारी परेशानियों का सामना किया जा रहा है। सरकारी आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला।

2 – छोटा राम ने कहा कि सरकार ने पहली किस्त में तीन-तीन लाख रुपए तो दिए मगर भूमि नहीं है तो आशियाने कहां बनाएं। सरकार शीघ्र छह मरला भूमि के पट्टे अलॉट करें।

3 – कुशल सिंह ने कहा कि न घर रहे न समान, सरकार के झूठे आश्वासनों ने विश्वास ही तोड़ दिया। अब जिंदगी भगवान भरोसे काटने का मन बना लिया है। किसी से कोई उम्मीद नहीं है।

4 – प्रभात सिंह ने कहा कि मेहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से पाई पाई कमाकर सिर छुपाने के लिए आशियाना बनाया। वह कुदरत के कहर से छिन गया। और एक साल से दर- बदर है। प्रशासन तथा सरकार की कुंभकर्णी नींद अभी नहीं टूटी। और शीघ्र छह मरले भूमि के पट्टे अलॉट कर प्रभावितों को जारी करें ताकि वह अपना आशियाना बना सके।

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