हिमाचल पंचायत चुनाव: आज बजेगा बिगुल, हिमाचल में आज पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान, लग जाएगी आचार संहिता; जानें

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल की सियासत में आज बड़ा दिन साबित हो सकता है। पंचायत चुनावों की तारीखों के ऐलान को लेकर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। जैसे ही चुनावी बिगुल बजेगा, गांव-गांव में सियासी हलचल तेज हो जाएगी और प्रदेशभर में आचार संहिता लागू हो जाएगी।

प्रदेश में वोटर लिस्ट को पिछले कल फाइनल कर दिया गया है। ऐसे में सत्ता के गलियारों से लेकर पंचायत चौपालों तक सिर्फ राज्य निर्वाचन आयोग की चुनाव की घोषणा का इंतजार है। वहीं, पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं।

गांव की सरकार बनाने की तैयारियों के बीच संभावित उम्मीदवारों ने अभी से मैदान संभाल लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समर्थकों के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने, जनसमर्थन जुटाने और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। पंचायत स्तर से लेकर जिला परिषद तक चुनावी चर्चा हर गांव, चौपाल और राजनीतिक गलियारों में सुनाई देने लगी है।

31,214 सीटों के लिए होगी जंग

हिमाचल की सियासत अब गांव-गांव में तपने वाली है। सत्ता का असली रण इस बार पंचायत चुनावों में देखने को मिलेगा, जहां विकास, वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर होगी।

  • प्रदेश भर में कुल 31,214 सीटों पर चुनावी महासंग्राम छिड़ने जा रहा है और हर सीट पर स्थानीय राजनीति का तापमान लगातार बढ़ रहा है।
  • जिला परिषद से लेकर पंचायत सदस्य तक, हर पद पर दावेदारों की लंबी कतारें होंगी।
  • सबसे बड़ी लड़ाई पंचायत मेंबर के 21,678 पदों पर होगी, जहां गांव की राजनीति का सीधा फैसला जनता के हाथ में होगा।
  • वहीं, पंचायत प्रधान के 3,758 और उपप्रधान के 3,758 पदों पर भी प्रतिष्ठा की जंग बेहद दिलचस्प रहने वाली है।
  • पंचायत समिति के 1,769 पदों पर राजनीतिक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
  • वहीं, जिला परिषद सदस्य के 251 पदों पर भी कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है।

कांगड़ा में सबसे ज्यादा सीटें

  • हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 6,977 सीटों के साथ चुनावी रण का केंद्र बना हुआ है।
  • वहीं, लाहौल-स्पीति में सबसे कम 378 सीटों पर संघर्ष देखने को मिलेगा।
  • इसी तरह से बिलासपुर में 1,615 सीटें,
  • चंबा में 2,584 सीटें,
  • हमीरपुर में 1,998 सीटें,
  • किन्नौर में 635 सीटें,
  • कुल्लू में 2,043 सीटें,
  • मंडी में 4,762 सीटें,
  • शिमला में 3,523 सीटें,
  • सोलन में 2,216 सीटें,
  • सिरमौर में 2,344 सीटें और
  • ऊना में 2,139 सीटों पर उम्मीदवारों के बीच वर्चस्व की जंग लड़ी जाएगी।

पिछली बार से 636 सीटें ज्यादा

हिमाचल में पंचायत चुनावों का रण इस बार पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प और व्यापक होने जा रहा है। साल 2021 में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में कुल 30,578 सीटों के लिए उम्मीदवारों के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिला था।

वहीं, इस बार पंचायतों की संख्या बढ़ने के साथ चुनावी तस्वीर भी बदल गई है। पंचायत सदस्य से लेकर जिला परिषद सदस्यों तक अब कुल सीटों की संख्या बढ़कर 31,214 पहुंच गई है। यानी पिछली बार की तुलना में इस बार 636 अधिक सीटों पर लोकतंत्र का महायुद्ध लड़ा जाएगा।

आदर्श आचार संहिता क्या है?

आदर्श आचार संहिता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए निर्धारित किए गए मानकों का एक ऐसा समूह है जिसे राजनैतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों का आयोजन चुनाव आयोग का सांविधानिक कर्तव्य है।

आदर्श आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहती है?

चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है।

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