पंचायत चुनाव से पहले हिमाचल का ऐसा इलेक्शन, जहां 5 दिन से जारी है वोटों की गिनती, जीतने वाला होगा कानून की दुनिया का चर्चित चेहरा

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हिमखबर डेस्क

पंचायत चुनाव से पहले हिमाचल का ऐसा इलेक्शन, जहां 5 दिन से जारी है वोटों की गिनती, जीतने वाला होगा कानून की दुनिया का चर्चित चेहराइस चुनाव में 6 हजार के आसपास वोट पड़े हैं, लेकिन वोटों की गिनती पांच दिनों से जारी है, काउंटिंग में अभी और समय लगेगा

तकनीक के इस तेज दौर में जहां कुछ सेकंड में बड़े-बड़े आंकड़े गिने जाते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा चुनाव चल रहा है, जिसकी मतगणना कई दिनों से जारी है। 21 अप्रैल को मतदान और 23 अप्रैल से शुरू हुई गिनती 27 अप्रैल तक भी पूरी नहीं हो पाई है। यह चुनाव है हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल का, जहां धीमी मतगणना ने सभी का ध्यान खींचा है।

18 सीटों के लिए हुआ मतदान

हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल की कुल 20 सदस्यीय संस्था में 18 सीटों के लिए 21 अप्रैल को मतदान हुआ। इस चुनाव में प्रदेश की 51 बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। कुल करीब 6,662 वकीलों ने वोट डाले, जिनमें से 5,952 मत वैध पाए गए। अब इन्हीं मतों की गिनती पिछले कई दिनों से लगातार जारी है।

कम वोट फिर भी लंबी गिनती क्यों?

आमतौर पर 6 हजार के आसपास वोटों की गिनती कुछ घंटों में पूरी हो जाती है, लेकिन इस चुनाव में ऐसा नहीं हो रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह है “प्रेफरेंशियल वोट सिस्टम” यानी वरीयता आधारित मतदान प्रणाली। यही कारण है कि मतगणना प्रक्रिया लंबी और जटिल हो गई है।

क्या है प्रेफरेंशियल वोट सिस्टम?

इस प्रणाली में मतदाता सिर्फ एक उम्मीदवार को वोट नहीं देता, बल्कि अपनी पसंद के अनुसार कई उम्मीदवारों को क्रम में रखता है- जैसे पहली पसंद, दूसरी पसंद, तीसरी पसंद। सबसे पहले पहली वरीयता के वोट गिने जाते हैं। अगर कोई उम्मीदवार तय कोटा पूरा कर लेता है तो उसे विजेता घोषित किया जाता है।

अगर कोई उम्मीदवार पहली वरीयता में कोटा पूरा नहीं कर पाता, तो दूसरी वरीयता के वोट जोड़े जाते हैं। इसी तरह तीसरी और चौथी वरीयता तक गिनती चलती है। इस प्रक्रिया में बार-बार वोटों का ट्रांसफर होता है, जिससे गिनती में काफी समय लगता है।

कैसे तय होता है विजेता?

इस चुनाव में 18 सीटों के लिए 45 उम्मीदवार मैदान में हैं। हर उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 332 वोटों का कोटा पूरा करना जरूरी है। अगर कोई उम्मीदवार कोटा पूरा नहीं करता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोट अन्य उम्मीदवारों में ट्रांसफर किए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक सभी सीटें भर नहीं जातीं।

अब तक क्या रही स्थिति?

लगभग पांच दिन की गिनती के बाद अब तक सिर्फ दो उम्मीदवारों को विजेता घोषित किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय माकन पहले स्थान पर रहे हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा पहली वरीयता के वोट मिले हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता संजय भूषण को भी विजेता घोषित किया जा चुका है। बाकी सीटों के लिए मतगणना अभी जारी है और इसमें कुछ और दिन लग सकते हैं।

क्यों खास है यह चुनाव?

यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर चरण को सावधानी से पूरा किया जा रहा है। वरीयता आधारित प्रणाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधित्व देती है, लेकिन इसके कारण समय ज्यादा लगता है।

हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल चुनाव यह दिखाता है कि हर चुनाव सिर्फ वोटों की संख्या पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया की जटिलता पर भी निर्भर करता है। भले ही वोट कम हों, लेकिन अगर प्रणाली जटिल है, तो परिणाम आने में समय लगना तय है।

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