हिमखबर डेस्क
14 दिनों से जिस बेटे की एक झलक पाने के लिए मां-बाप की आंखें दरवाजे पर टिकी थीं, वह आखिरकार वतन तो लौटा… लेकिन खामोश। एंबुलेंस से उतरे बेटे के पार्थिव शरीर को देखते ही परिवार का सब्र टूट गया और पूरा गांव सिसक उठा।
बड़सर उपमंडल की महारल पंचायत के काली चिक गांव में उस समय दिल दहला देने वाला मंजर था, जब दक्षिण अफ्रीका में जान गंवाने वाले युवक अमन का शव घर पहुंचा। अमन अपने परिवार के बेहतर भविष्य और आजीविका की तलाश में दक्षिण अफ्रीका गया था, जहां वह एक होटल में कार्यरत था।
परिवार को उम्मीद थी कि उनका बेटा विदेश में मेहनत कर घर की स्थिति बेहतर करेगा, लेकिन 12 अप्रैल को आई उसकी अचानक मौत की खबर ने सब कुछ बदल दिया। इस दुखद सूचना ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

शव को भारत लाने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। विदेश से पार्थिव शरीर लाने के लिए कई प्रशासनिक और कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ीं, जिसके चलते परिजनों को 14 दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान परिवार अपने बेटे की एक अंतिम झलक पाने के लिए हर पल तड़पता रहा।
अंततः स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों से यह प्रक्रिया पूरी हो सकी और अमन का पार्थिव शरीर वतन लौट सका। रविवार सुबह जब अमन का शव गांव पहुंचा, तो माता-पिता और परिजनों का विलाप सुनकर हर किसी का दिल दहल उठा।
14 दिनों का इंतजार खत्म तो हुआ, लेकिन बेटे को इस हालत में देखकर परिवार का दर्द और भी गहरा हो गया। गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और नम आंखों से उसे विदाई दी। दोपहर बाद गमगीन माहौल में अमन का अंतिम संस्कार उसके पैतृक घाट पर किया गया।
पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना रहा। एक हंसता-खेलता युवा, जो परिवार की उम्मीदों का सहारा था, इस तरह अचानक चला जाना किसी के लिए भी स्वीकार करना आसान नहीं है। इस घटना ने न केवल महारल बल्कि पूरे हमीरपुर जिले को झकझोर कर रख दिया है।
अमन की असमय मौत ने यह कड़वी सच्चाई फिर सामने रख दी है कि रोजी-रोटी की तलाश में विदेश जाने वाले कई युवाओं के पीछे उनके परिवार की कितनी उम्मीदें और सपने जुड़े होते हैं, जो कभी-कभी अधूरे ही रह जाते हैं।

