हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश की यूनिवर्सिटी ने फर्जी डिग्री घोटाले के जरिये करीब 387 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई है। इसे फर्जी लेन-देन के माध्यम से घुमाकर देशभर में चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय अब तक करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुका है, जिन्हें अदालत ने वैध ठहराते हुए जब्ती की कार्रवाई को मंजूरी दे दी है।
जांच में सामने आया कि सोलन जिले के मानव भारती विश्वविद्यालय से जुड़ा यह फर्जी डिग्री घोटाला बेहद संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। एजेंटों और बिचौलियों के जरिये छात्रों को लाखों रुपये लेकर नकली डिग्रियां बेची जाती थी। इस पूरे नेटवर्क का संचालन राज कुमार राणा, उसकी पत्नी अशोनी कंवर और बेटा मंदीप राणा कर रहे थे।
ईडी ने जांच के दौरान चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और राजपुरा (पटियाला) सहित कई स्थानों पर स्थित संपत्तियों को चिह्नित कर जब्त किया। इनमें रिहायशी प्लाट, व्यावसायिक भवन और अन्य निवेश शामिल हैं, जिन्हें घोटाले की कमाई से खरीदा गया था।

ईडी चंडीगढ़ जोनल आफिस ने बीते बुधवार को इन स्थानों पर सर्च आपरेशन भी चलाया। इसमें कई अहम दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के सबूत हाथ लगे। मामले की शुरुआत धर्मपुर पुलिस स्टेशन सोलन में दर्ज तीन एफआइआर से हुई थी। आइपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद ईडी ने पीएमएलए 2002 के तहत मनी लाड्रिंग की जांच शुरू की।
जांच में स्पष्ट हुआ कि घोटाले से अर्जित धन को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग खातों और निवेशों के जरिए छुपाया गया। मुख्य आरोपित मंदीप राणा जांच के दौरान लगातार फरार रहा और कई बार समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ। न्यायिक प्रक्रिया से बचने के चलते उसे तीन जनवरी 2026 को भगौड़ा अपराधी घोषित किया गया।
विशेष पीएमएलए कोर्ट शिमला ने 23 अप्रैल को ईडी की याचिका को मंजूर करते हुए आरोपित की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि ये संपत्तियां अपराध की कमाई से जुड़ी हैं और कानून के तहत इनकी जब्ती पूरी तरह उचित है।

